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ओपनएआई का नया GPT-5.5 इंस्टेंट: ChatGPT का डिफ़ॉल्ट मॉडल, झूठे जवाबों में 52.5% की कमी

ओपनएआई ने GPT-5.5 इंस्टेंट को ChatGPT का नया डिफ़ॉल्ट मॉडल बनाया है, जो चिकित्सा, क़ानून और वित्त जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में झूठे जवाबों (हैलूसिनेशन) को 52.5% तक कम करता है।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 17 बार देखा
ओपनएआई का नया GPT-5.5 इंस्टेंट: ChatGPT का डिफ़ॉल्ट मॉडल, झूठे जवाबों में 52.5% की कमी
ओपनएआई का लोगो; कंपनी ने ChatGPT के लिए नया डिफ़ॉल्ट मॉडल GPT-5.5 इंस्टेंट जारी किया है।

सैन फ्रांसिस्को, 5 मई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अग्रणी कंपनी ओपनएआई ने अपने लोकप्रिय चैटबॉट ChatGPT के लिए एक नया डिफ़ॉल्ट मॉडल—GPT-5.5 इंस्टेंट—जारी किया है। यह नया मॉडल पिछले GPT-5.3 इंस्टेंट की जगह लेता है और इसका सबसे बड़ा फ़ोकस है AI की एक पुरानी समस्या—"हैलूसिनेशन" यानी आत्मविश्वास से ग़लत या मनगढ़ंत जानकारी देना—को कम करना। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल उच्च-जोखिम वाले सवालों पर अपने पूर्ववर्ती की तुलना में 52.5% कम झूठे दावे करता है। दुनिया भर में करोड़ों लोग रोज़मर्रा के कामों, पढ़ाई और पेशेवर ज़रूरतों के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह अपडेट बेहद व्यापक प्रभाव डालने वाला है।

हैलूसिनेशन में नाटकीय कमी

इस रिलीज़ का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा, क़ानून और वित्त जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सटीकता बढ़ाना है। ओपनएआई के अनुसार, इन डोमेन में हैलूसिनेशन की दर लगभग 20% से घटकर मात्र 3% के आसपास रह गई है। यह सुधार उन उपयोगकर्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो गंभीर निर्णयों के लिए AI पर निर्भर करते हैं, क्योंकि ग़लत जानकारी के परिणाम इन क्षेत्रों में गंभीर हो सकते हैं। हैलूसिनेशन को AI की सबसे बड़ी कमज़ोरियों में से एक माना जाता रहा है, और इसी वजह से कई संस्थाएँ संवेदनशील कामों में इन उपकरणों को अपनाने से हिचकिचाती थीं।

बेहतर तर्कशक्ति और मल्टीमॉडल प्रदर्शन

GPT-5.5 इंस्टेंट सिर्फ़ कम ग़लतियाँ ही नहीं करता, बल्कि इसकी समग्र क्षमताएँ भी बेहतर हुई हैं। इसने AIME 2025 गणित परीक्षा में 81.2 का स्कोर हासिल किया, जबकि पुराने मॉडल का स्कोर 65.4 था। इसी तरह, MMMU-Pro मल्टीमॉडल रीज़निंग बेंचमार्क पर भी इसने 76 का स्कोर दर्ज किया, जो पुराने मॉडल के 69.2 से कहीं बेहतर है। मॉडल अब विषयों की विस्तृत श्रृंखला में अधिक सटीक, संक्षिप्त और स्वाभाविक जवाब देता है। ख़ास बात यह है कि ये सुधार मॉडल की गति को प्रभावित किए बिना हासिल किए गए हैं—"इंस्टेंट" मॉडल का मुख्य आकर्षण इसकी तेज़ प्रतिक्रिया ही है।

नया 'मेमोरी सोर्सेज़' फ़ीचर

व्यक्तिगतकरण (पर्सनलाइज़ेशन) के मोर्चे पर, ओपनएआई ने एक नया 'मेमोरी सोर्सेज़' फ़ीचर जोड़ा है। यह फ़ीचर उपयोगकर्ताओं को दिखाता है कि किसी जवाब को तैयार करने में कौन-सा व्यक्तिगत संदर्भ—पुरानी बातचीत, सहेजे गए रिमाइंडर या अपलोड की गई फ़ाइलें—इस्तेमाल हुआ। उपयोगकर्ता इन व्यक्तिगत प्रविष्टियों को सुधार या हटा भी सकते हैं, जिससे पारदर्शिता और नियंत्रण दोनों बढ़ते हैं। ऐसे समय में जब AI और डेटा गोपनीयता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं, यह फ़ीचर उपयोगकर्ताओं को अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण देने की दिशा में एक स्वागत-योग्य कदम है।

डेवलपर्स के लिए API पहुँच

डेवलपर्स के लिए GPT-5.5 इंस्टेंट को API में "chat-latest" के रूप में उपलब्ध कराया गया है, जबकि पुराना GPT-5.3 मॉडल पेड उपयोगकर्ताओं के लिए तीन महीने तक उपलब्ध रहेगा। यह क्रमिक बदलाव सुनिश्चित करता है कि मौजूदा एप्लिकेशन और सेवाएँ बिना किसी अचानक व्यवधान के नए मॉडल पर स्थानांतरित हो सकें। 9 जून तक, व्यक्तिगतकरण से जुड़े सुधार ChatGPT Go और फ्री टियर के उपयोगकर्ताओं तक भी पहुँच गए हैं। दुनिया भर के हज़ारों स्टार्टअप और कंपनियाँ ओपनएआई के API पर अपने उत्पाद बनाती हैं, इसलिए डिफ़ॉल्ट मॉडल में हर बदलाव का व्यापक असर पड़ता है।

AI दौड़ में ओपनएआई की रणनीति

यह रिलीज़ ऐसे समय में आई है जब AI मॉडलों के बीच प्रतिस्पर्धा तीव्र है और भरोसेमंदता एक प्रमुख मुद्दा बन गई है। हैलूसिनेशन को कम करने पर ज़ोर देकर ओपनएआई उन व्यावसायिक और पेशेवर उपयोगकर्ताओं को लक्षित कर रही है जिन्हें सटीकता की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। कंपनी ने मई में GPT-Realtime-2 भी जारी किया था और जून में GPT-5.6 की भी अटकलें हैं, जो इसकी तेज़ नवाचार गति को दर्शाता है। गूगल, एंथ्रोपिक और अन्य प्रतिद्वंद्वियों के साथ चल रही इस होड़ में हर कंपनी अपने मॉडल को सबसे सटीक और भरोसेमंद साबित करने की कोशिश में जुटी है।

आगे क्या?

GPT-5.5 इंस्टेंट के डिफ़ॉल्ट बनने के साथ, करोड़ों ChatGPT उपयोगकर्ता अब अधिक भरोसेमंद और व्यक्तिगत अनुभव पाएँगे। संवेदनशील क्षेत्रों में बेहतर सटीकता AI को स्वास्थ्य, क़ानूनी और वित्तीय सलाह जैसे संवेदनशील उपयोग के और करीब लाती है, हालाँकि विशेषज्ञ अब भी मानवीय निगरानी की ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ इस चुनौती का जवाब कैसे देती हैं और AI की विश्वसनीयता की यह दौड़ कहाँ तक पहुँचती है। फ़िलहाल, GPT-5.5 इंस्टेंट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम के रूप में देखा जा रहा है, जो AI को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का और भरोसेमंद हिस्सा बनाने की ओर ले जाता है।

स्रोत: TechCrunch
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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