सैन फ्रांसिस्को, 5 मई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अग्रणी कंपनी ओपनएआई ने अपने लोकप्रिय चैटबॉट ChatGPT के लिए एक नया डिफ़ॉल्ट मॉडल—GPT-5.5 इंस्टेंट—जारी किया है। यह नया मॉडल पिछले GPT-5.3 इंस्टेंट की जगह लेता है और इसका सबसे बड़ा फ़ोकस है AI की एक पुरानी समस्या—"हैलूसिनेशन" यानी आत्मविश्वास से ग़लत या मनगढ़ंत जानकारी देना—को कम करना। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल उच्च-जोखिम वाले सवालों पर अपने पूर्ववर्ती की तुलना में 52.5% कम झूठे दावे करता है। दुनिया भर में करोड़ों लोग रोज़मर्रा के कामों, पढ़ाई और पेशेवर ज़रूरतों के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह अपडेट बेहद व्यापक प्रभाव डालने वाला है।
हैलूसिनेशन में नाटकीय कमी
इस रिलीज़ का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा, क़ानून और वित्त जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सटीकता बढ़ाना है। ओपनएआई के अनुसार, इन डोमेन में हैलूसिनेशन की दर लगभग 20% से घटकर मात्र 3% के आसपास रह गई है। यह सुधार उन उपयोगकर्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो गंभीर निर्णयों के लिए AI पर निर्भर करते हैं, क्योंकि ग़लत जानकारी के परिणाम इन क्षेत्रों में गंभीर हो सकते हैं। हैलूसिनेशन को AI की सबसे बड़ी कमज़ोरियों में से एक माना जाता रहा है, और इसी वजह से कई संस्थाएँ संवेदनशील कामों में इन उपकरणों को अपनाने से हिचकिचाती थीं।
बेहतर तर्कशक्ति और मल्टीमॉडल प्रदर्शन
GPT-5.5 इंस्टेंट सिर्फ़ कम ग़लतियाँ ही नहीं करता, बल्कि इसकी समग्र क्षमताएँ भी बेहतर हुई हैं। इसने AIME 2025 गणित परीक्षा में 81.2 का स्कोर हासिल किया, जबकि पुराने मॉडल का स्कोर 65.4 था। इसी तरह, MMMU-Pro मल्टीमॉडल रीज़निंग बेंचमार्क पर भी इसने 76 का स्कोर दर्ज किया, जो पुराने मॉडल के 69.2 से कहीं बेहतर है। मॉडल अब विषयों की विस्तृत श्रृंखला में अधिक सटीक, संक्षिप्त और स्वाभाविक जवाब देता है। ख़ास बात यह है कि ये सुधार मॉडल की गति को प्रभावित किए बिना हासिल किए गए हैं—"इंस्टेंट" मॉडल का मुख्य आकर्षण इसकी तेज़ प्रतिक्रिया ही है।
नया 'मेमोरी सोर्सेज़' फ़ीचर
व्यक्तिगतकरण (पर्सनलाइज़ेशन) के मोर्चे पर, ओपनएआई ने एक नया 'मेमोरी सोर्सेज़' फ़ीचर जोड़ा है। यह फ़ीचर उपयोगकर्ताओं को दिखाता है कि किसी जवाब को तैयार करने में कौन-सा व्यक्तिगत संदर्भ—पुरानी बातचीत, सहेजे गए रिमाइंडर या अपलोड की गई फ़ाइलें—इस्तेमाल हुआ। उपयोगकर्ता इन व्यक्तिगत प्रविष्टियों को सुधार या हटा भी सकते हैं, जिससे पारदर्शिता और नियंत्रण दोनों बढ़ते हैं। ऐसे समय में जब AI और डेटा गोपनीयता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं, यह फ़ीचर उपयोगकर्ताओं को अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण देने की दिशा में एक स्वागत-योग्य कदम है।