न्यूयॉर्क, 14 जून। फीफा विश्व कप 2026 के एक हाई-प्रोफाइल ग्रुप मुक़ाबले में पाँच बार के चैंपियन ब्राज़ील को मोरक्को के ख़िलाफ़ 1-1 की बराबरी से ही संतोष करना पड़ा। रियल मैड्रिड के स्टार विनीसियस जूनियर ने 32वें मिनट में बराबरी का गोल दागकर अपनी टीम को हार से बचाया। यह 48 टीमों वाले विस्तारित टूर्नामेंट के पहले दौर का अब तक का सबसे बड़ा आकर्षण रहा, क्योंकि शीर्ष 10 में शामिल छठे रैंक के ब्राज़ील और सातवें रैंक के मोरक्को की यह इकलौती भिड़ंत थी। न्यूयॉर्क के खचाखच भरे स्टेडियम में दोनों देशों के हज़ारों प्रशंसकों ने इस रोमांचक मुक़ाबले का भरपूर लुत्फ़ उठाया।
मोरक्को की दमदार शुरुआत
अफ्रीकी चैंपियन मोरक्को ने मैच की शुरुआत से ही दबदबा बनाया। नील एल आयनाउई और अशरफ हकीमी ने ब्राज़ील के गोल पर लगातार ख़तरा पैदा किया। आख़िरकार 21वें मिनट में इस्माइल सायबारी ने ब्राहिम दियाज़ के बेहतरीन पास पर मार्किन्होस और गैब्रिएल मैगाल्हेस को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ते गोलकीपर एलिसन बेकर के ऊपर से एक शानदार चिप शॉट लगाकर गेंद जाल में पहुँचा दी। PSV आइंदहोवन के इस फॉरवर्ड के क्लिनिकल फ़िनिश ने मोरक्को को बढ़त दिला दी। पहले हाफ़ में मोरक्को की तेज़, संगठित और आत्मविश्वास से भरी खेल शैली ने ब्राज़ील के बचाव को लगातार परेशान किया।
विनीसियस का बेहतरीन गोल
ब्राज़ील की वापसी के नायक रहे विनीसियस जूनियर। 32वें मिनट में उन्होंने ब्रूनो गिमारेस से गेंद मिलने के बाद बॉक्स के बाएँ हिस्से से अंदर की ओर कट किया और अपने दाएँ पैर से गेंद को मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू के दूर वाले कोने में ज़ोरदार शॉट से पहुँचा दिया। यह गोल विनीसियस की व्यक्तिगत क्षमता और बड़े मंच पर निर्णायक खिलाड़ी बनने की उनकी प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है। हाल के वर्षों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिने जाने वाले विनीसियस से ब्राज़ील को इस टूर्नामेंट में बड़ी उम्मीदें हैं, और इस गोल ने उन उम्मीदों को और बल दिया।
एंचेलोटी की प्रतिक्रिया
ब्राज़ील के कोच कार्लो एंचेलोटी ने माना कि उनकी टीम शुरुआत में दबाव में दिखी। उन्होंने कहा, "यह एक कठिन मुक़ाबला था, ख़ासकर पहले हाफ़ में। शायद टीम थोड़ी घबराई हुई थी और नर्वस लग रही थी। दूसरा हाफ़ बेहतर रहा, लेकिन फिर भी कठिन था, और मुझे यक़ीन है कि हम और बेहतर होंगे।" यह मुक़ाबला एंचेलोटी की देखरेख में ब्राज़ील के लिए एक चेतावनी की तरह रहा। इटैलियन कोच एंचेलोटी, जो ब्राज़ील की कमान संभालने वाले पहले विदेशी कोचों में से एक हैं, पर इस फुटबॉल-प्रेमी देश को छठा विश्व खिताब दिलाने का भारी दबाव है।