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अमेरिकी हमले में तेन दे अरागुआ गिरोह का सरगना ढेर: ट्रंप का दावा, वेनेजुएला के सहयोग से हुई कार्रवाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जून 2026 को घोषणा की कि एक अमेरिकी सैन्य हमले में कुख्यात तेन दे अरागुआ गिरोह के सरगना हेक्टर रस्थेनफोर्ड गुएरेरो फ्लोरेस को मार गिराया गया। यह कार्रवाई अमेरिका और वेनेजुएला की सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त अभियान में बोलिवार राज्य में की गई।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 22 बार देखा
अमेरिकी हमले में तेन दे अरागुआ गिरोह का सरगना ढेर: ट्रंप का दावा, वेनेजुएला के सहयोग से हुई कार्रवाई
वेनेजुएला की राजधानी काराकस का दृश्य; तेन दे अरागुआ गिरोह की जड़ें इसी देश में हैं।

वाशिंगटन, 13 जून। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि एक अमेरिकी सैन्य हमले में कुख्यात अपराधी गिरोह 'तेन दे अरागुआ' (ट्रेन डी अरागुआ) के सरगना हेक्टर रस्थेनफोर्ड गुएरेरो फ्लोरेस को मार गिराया गया है। ट्रंप ने 12 जून 2026 को इसे 'त्वरित और घातक' हमला बताते हुए कहा कि गुएरेरो को इस कार्रवाई में मार गिराया गया। उन्होंने गुएरेरो को इस खूंखार गिरोह का 'कुख्यात सरगना' करार दिया। यह कार्रवाई अमेरिका और वेनेजुएला की सुरक्षा एजेंसियों के एक संयुक्त अभियान के तहत वेनेजुएला के बोलिवार राज्य में की गई।

संयुक्त अभियान का दावा

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि यह हमला इसी सप्ताह के शुरुआत में वेनेजुएला में तेन दे अरागुआ के एक ठिकाने पर किया गया। अमेरिका की दक्षिणी कमान (साउथर्न कमांड) ने इस घातक हमले को अंजाम दिया। उल्लेखनीय बात यह रही कि वेनेजुएला के संचार मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि गुएरेरो फ्लोरेस को अमेरिकी बलों और वेनेजुएला की सुरक्षा सेवाओं के बीच एक 'संयुक्त अभियान' में मार गिराया गया, जो देश के बोलिवार राज्य में संगठित अपराध को निशाना बनाने के लिए चलाया गया था।

कौन था गुएरेरो फ्लोरेस

हेक्टर रस्थेनफोर्ड गुएरेरो फ्लोरेस, जिसे 'निनो गुएरेरो' के नाम से भी जाना जाता था, तेन दे अरागुआ गिरोह का प्रमुख था। यह गिरोह वेनेजुएला में जन्मा और बाद में पूरे लैटिन अमेरिका तथा अमेरिका तक फैल गया। अमेरिका ने इस गिरोह को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। गुएरेरो फ्लोरेस पर न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में रैकेटियरिंग (संगठित अपराध) की साजिश और अन्य अपराधों के आरोप लगे थे, जिनमें एक दशक से अधिक समय तक फैले अपराधों में आतंकवादियों को समर्थन देना भी शामिल था।

ट्रंप का बयान और वीडियो

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्रवाई की घोषणा करते हुए एक 10 सेकंड का वीडियो भी साझा किया, जिसमें एक संरचना पर हमला होते दिखाया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई वेनेजुएला के नेतृत्व के साथ समन्वय में की गई थी। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका और वेनेजुएला के बीच असामान्य सहयोग को दर्शाता है, जो हाल के वर्षों में संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त प्रयासों की दिशा में एक नया मोड़ हो सकता है।

तेन दे अरागुआ का खतरा

तेन दे अरागुआ गिरोह पिछले कुछ वर्षों में लैटिन अमेरिका के सबसे खतरनाक आपराधिक संगठनों में से एक बनकर उभरा है। मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में इसकी संलिप्तता रही है। वेनेजुएला से शुरू होकर यह गिरोह कई देशों में अपना जाल फैला चुका है, जिससे यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिका ने इसके शीर्ष नेताओं पर पहले भी प्रतिबंध लगाए थे और इसे आतंकवादी संगठन की सूची में डाला था।

क्षेत्रीय और कूटनीतिक निहितार्थ

इस कार्रवाई के व्यापक क्षेत्रीय और कूटनीतिक निहितार्थ हैं। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच राजनीतिक संबंध वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं, ऐसे में संगठित अपराध के खिलाफ इस तरह का संयुक्त अभियान दोनों देशों के बीच एक नए प्रकार के व्यावहारिक सहयोग का संकेत हो सकता है। हालांकि, इस अभियान की प्रकृति और इसमें इस्तेमाल की गई सैन्य शक्ति को लेकर कुछ कानूनी और राजनीतिक सवाल भी उठ सकते हैं, विशेषकर किसी अन्य देश की धरती पर सैन्य कार्रवाई की वैधता के संबंध में।

प्रवासन और अपराध का अंतरराष्ट्रीय आयाम

तेन दे अरागुआ का उदय वेनेजुएला के गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकट से जुड़ा है। बीते वर्षों में आर्थिक पतन, अति-मुद्रास्फीति और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लाखों वेनेजुएलावासी देश छोड़कर पड़ोसी देशों—कोलंबिया, पेरू, चिली, ब्राज़ील—और अमेरिका की ओर पलायन कर गए। इस बड़े पैमाने के प्रवासन के बीच तेन दे अरागुआ जैसे आपराधिक गिरोहों ने भी अपना विस्तार किया और कई देशों में अपराध के नेटवर्क खड़े कर लिए। अमेरिका में इस गिरोह का नाम राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां ट्रंप प्रशासन इसे सीमा सुरक्षा और कड़ी आव्रजन नीति के पक्ष में एक प्रमुख तर्क के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए केवल सैन्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; इसके लिए आर्थिक अवसर पैदा करना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और प्रवासन के मूल कारणों का समाधान करना भी आवश्यक है। यह घटना दक्षिण और उत्तर अमेरिका के बीच साझा सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को उजागर करती है, जहां अपराध, प्रवासन और कूटनीति आपस में गहराई से गुंथे हुए हैं।

आगे की राह

विश्लेषक मानते हैं कि गिरोह के सरगना का मारा जाना तेन दे अरागुआ के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन इससे संगठन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। ऐसे आपराधिक नेटवर्क अक्सर विकेंद्रीकृत होते हैं और एक नेता के हटने के बाद भी सक्रिय बने रहते हैं। अमेरिका और क्षेत्रीय देशों को इस खतरे से निपटने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने होंगे। यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग कितना महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों को किस दिशा में ले जाती है।

स्रोत: NBC News
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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