एवियां-ले-बैं, 12 जून। दुनिया की सात बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के समूह—जी7—का वार्षिक शिखर सम्मेलन इस वर्ष फ्रांस की मेजबानी में आयोजित हो रहा है। यह सम्मेलन 15 से 17 जून 2026 तक स्विट्जरलैंड की सीमा के निकट स्थित रमणीक शहर एवियां-ले-बैं में होगा। यह दूसरा अवसर है जब एवियां इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है; इससे पहले 2003 में यहां 29वां जी8 शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस वर्ष के सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, बहुपक्षवाद और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी।
कौन-कौन हो रहा शामिल
जी7 के मूल सदस्य देशों के नेता इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं—कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन कर रही हैं।
भारत को विशेष आमंत्रण
इस वर्ष फ्रांस ने कई महत्वपूर्ण देशों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है, जिनमें भारत प्रमुख है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की भागीदारी वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती कूटनीतिक हैसियत का प्रमाण है। भारत के अलावा ब्राज़ील (राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा), केन्या (राष्ट्रपति विलियम रुटो), दक्षिण कोरिया (राष्ट्रपति ली जे म्युंग) और सीरिया (राष्ट्रपति अहमद अल-शरा) को भी आमंत्रित किया गया है। यह आमंत्रण उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ की आवाज को इस मंच पर शामिल करने के प्रयास को दर्शाता है।
एजेंडा पर ज्वलंत मुद्दे
इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का एजेंडा कई गंभीर वैश्विक चुनौतियों से भरा है। अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा प्रमुख विषय है, क्योंकि दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और तनाव जारी हैं। इसके अलावा, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर भी गहन विचार-विमर्श होगा। व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है। ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों और टैरिफ को लेकर भी नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है।
भारत के लिए महत्व
जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह भारत को विश्व की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ सीधे संवाद का अवसर प्रदान करती है। प्रधानमंत्री मोदी इस मंच का उपयोग व्यापार, निवेश, जलवायु और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत के हितों को आगे बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। साथ ही, ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में भारत विकासशील देशों की चिंताओं को भी इस मंच पर उठा सकता है। यह सम्मेलन द्विपक्षीय बैठकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।