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ग्रैमी 2026 में भारत की गूंज: अनुष्का शंकर को दो नामांकन, शक्ति और चारु सूरी ने भी बढ़ाया देश का मान

68वें ग्रैमी पुरस्कारों में भारतीय और भारतीय मूल के कलाकारों ने जोरदार मौजूदगी दर्ज कराई। सितार वादक अनुष्का शंकर को दो श्रेणियों में नामांकन मिला, हालांकि बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक परफॉर्मेंस का पुरस्कार उनके हाथ नहीं लगा।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 36 बार देखा
ग्रैमी 2026 में भारत की गूंज: अनुष्का शंकर को दो नामांकन, शक्ति और चारु सूरी ने भी बढ़ाया देश का मान
सितार वादक अनुष्का शंकर, जिन्हें 68वें ग्रैमी पुरस्कारों में दो श्रेणियों में नामांकन मिला।

लॉस एंजिलिस, 12 जून 2026। संगीत की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंच ग्रैमी पुरस्कारों के 68वें संस्करण में भारत की मौजूदगी इस साल खास तौर पर मजबूत रही। 1 फरवरी 2026 को लॉस एंजिलिस के क्रिप्टो डॉट कॉम एरीना में आयोजित इस समारोह में भारतीय और भारतीय मूल के कई कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। सबसे ज्यादा चर्चा सितार वादक अनुष्का शंकर की रही, जिन्हें दो प्रतिष्ठित श्रेणियों में नामांकन मिला और जिन्होंने एक बार फिर भारतीय शास्त्रीय संगीत की वैश्विक पहचान को मजबूत किया।

अनुष्का शंकर का दोहरा नामांकन

महान सितार वादक पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर को बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम श्रेणी में उनके ईपी 'चैप्टर III: वी रिटर्न टू लाइट' के लिए और बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक परफॉर्मेंस श्रेणी में उनके गीत 'डेब्रेक' के लिए नामांकित किया गया। हालांकि बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक परफॉर्मेंस का पुरस्कार वैश्विक स्टार बैड बनी को उनके ट्रैक 'EoO' के लिए मिला, जिससे अनुष्का को निराशा हाथ लगी। फिर भी, लगातार ग्रैमी नामांकन हासिल करना उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है। यह उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव था।

शक्ति और अन्य भारतीय नाम

जैज-फ्यूजन बैंड शक्ति, जिसमें शंकर महादेवन जैसे दिग्गज शामिल हैं, ने भी इस साल नामांकन सूची में जगह बनाई। बैंड पहले भी ग्रैमी जीत चुका है और भारतीय फ्यूजन संगीत को विश्व मंच पर पहुंचाने में उसकी अहम भूमिका रही है। इसके अलावा, भक्ति संगीत कलाकार सिद्धांत भाटिया को उनके एल्बम 'साउंड्स ऑफ कुम्भा' के लिए बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम श्रेणी में नामांकन मिला, जो कुम्भ मेले की आध्यात्मिक ध्वनियों को समर्पित है। यह एल्बम भारत की आध्यात्मिक विरासत को संगीत के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाता है।

चारु सूरी का ऐतिहासिक नामांकन

पियानोवादक चारु सूरी ने इतिहास रचते हुए राग-जैज शैली की पहली कलाकार के रूप में बेस्ट कंटेम्पररी इंस्ट्रुमेंटल एल्बम श्रेणी में अपने एल्बम 'शायन' के लिए नामांकन हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय शास्त्रीय राग और पश्चिमी जैज के अनूठे मेल को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इन नामांकनों ने यह साबित किया कि भारतीय संगीत की विविधता अब विश्व के सबसे बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना रही है और नई पीढ़ी के कलाकार लगातार नई जमीन तोड़ रहे हैं।

बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम पर भारत का दबदबा

इस साल बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम श्रेणी में भारतीय कलाकारों की मौजूदगी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जहां छह में से कई स्थान भारतीय प्रस्तुतियों के नाम रहे। यह दर्शाता है कि भक्ति संगीत से लेकर जैज-फ्यूजन तक, भारतीय संगीत की कई धाराएं आज अंतरराष्ट्रीय श्रोताओं और जूरी दोनों का ध्यान खींच रही हैं। यह भारतीय संगीतकारों की वर्षों की मेहनत और उनकी कला की गहराई का प्रमाण है, जो किसी एक शैली तक सीमित नहीं है।

भारतीय संगीत की वैश्विक यात्रा

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कलाकारों ने ग्रैमी मंच पर लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत की है। पंडित रविशंकर और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसे दिग्गजों ने जिस राह की शुरुआत की थी, उसे आज अनुष्का शंकर, शंकर महादेवन और नई पीढ़ी के कलाकार आगे बढ़ा रहे हैं। शास्त्रीय, भक्ति, फ्यूजन और समकालीन संगीत की यह विविधता भारत की समृद्ध संगीत परंपरा को विश्व पटल पर एक नई पहचान दे रही है। यह यात्रा सिर्फ पुरस्कारों की नहीं, बल्कि भारतीय संगीत को वैश्विक मुख्यधारा में लाने की है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

ग्रैमी जैसे मंच पर भारतीय कलाकारों की यह मौजूदगी देश के युवा संगीतकारों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। यह उन्हें यह विश्वास दिलाती है कि अगर वे अपनी जड़ों से जुड़े रहकर मौलिक काम करें, तो वैश्विक मंच पर पहचान बनाना संभव है। आज भारत में स्वतंत्र संगीतकारों और फ्यूजन कलाकारों की एक नई पीढ़ी उभर रही है, जो शास्त्रीय परंपरा और आधुनिक ध्वनियों को मिलाकर कुछ नया रच रही है। ग्रैमी नामांकन इस आंदोलन को और बल देते हैं।

आगे क्या

भले ही इस साल कुछ पुरस्कार भारतीय कलाकारों के हाथ न लगे हों, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नामांकन अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह आने वाली पीढ़ी के संगीतकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अब निगाहें अगले साल के ग्रैमी पर टिक गई हैं, जहां भारतीय संगीत और भी मजबूत दावेदारी के साथ उतरने की तैयारी में है। भारतीय संगीत की यह वैश्विक यात्रा निश्चित रूप से और ऊंचाइयों को छूने वाली है, और आने वाले वर्षों में और भी भारतीय नाम इस मंच पर गूंजेंगे।

स्रोत: India TV News
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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