मुंबई, 22 मई। भारत के दो सबसे बड़े कारोबारी समूहों के बीच विदेशी निवेशकों की प्राथमिकता में बदलाव का संकेत देते हुए, दुनिया की सबसे बड़ी निवेश प्रबंधन कंपनियों में शामिल कैपिटल ग्रुप ने अडानी समूह की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। लॉस एंजिल्स स्थित इस निवेश प्रबंधक ने हाल के हफ्तों में अडानी समूह की तीन कंपनियों में 2 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की हिस्सेदारी खरीदी है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी होल्डिंग लगातार घटा रही है।
कहाँ-कहाँ खरीदी हिस्सेदारी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 5 मई को कैपिटल ग्रुप ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड में खुले बाजार के सौदों के जरिए लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी 74.86 अरब रुपये (करीब 77.6 करोड़ डॉलर) में खरीदी। इसके अलावा निवेशक ने अडानी पावर लिमिटेड और अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड में भी बाजार से खरीद के जरिए 1.5 से 2 प्रतिशत के बीच हिस्सेदारी जुटाई है। इन सौदों ने अडानी समूह की कंपनियों में बड़े वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि को रेखांकित किया है।
रिलायंस से हटता रुझान
कैपिटल ग्रुप का यह कदम केवल अडानी में निवेश बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ ही कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी घटाती रही है। आँकड़ों के अनुसार मार्च के अंत तक कंपनी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के करीब 14.2 करोड़ शेयर थे, जबकि छह वर्ष पहले यह संख्या लगभग 50 करोड़ थी। यह बदलाव भारत के दो सबसे बड़े समूहों के बीच एक प्रमुख वैश्विक निवेशक की प्राथमिकता में आए परिवर्तन को दर्शाता है।
क्यों आकर्षक हैं अडानी की कंपनियाँ
विश्लेषकों के अनुसार अडानी समूह की कंपनियों को भारत के बुनियादी ढाँचे के विकास, ऊर्जा संक्रमण और विनिर्माण को बढ़ावा देने पर एक 'लीवरेज्ड' दांव के रूप में देखा जा रहा है। बंदरगाह, बिजली और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समूह की मजबूत उपस्थिति इसे उन निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है, जो भारत की दीर्घकालिक ढाँचागत वृद्धि पर भरोसा कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में सरकार के पूँजीगत व्यय और नीतिगत प्राथमिकताओं ने भी निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया है।
व्यापक संदर्भ
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारतीय कॉर्पोरेट जगत में बड़े पैमाने पर पूँजी प्रवाह और रणनीतिक पुनर्संरचना देखी जा रही है। बड़े वैश्विक फंड भारत की वृद्धि-गाथा में हिस्सेदारी के लिए विभिन्न समूहों और क्षेत्रों में अपने दांव को संतुलित कर रहे हैं। किसी एक समूह से दूसरे की ओर झुकाव अक्सर उस समूह के मूल्यांकन, वृद्धि-संभावना और क्षेत्रीय अवसरों के आकलन पर निर्भर करता है। इस लिहाज से कैपिटल ग्रुप का कदम भारतीय बाजार में विदेशी निवेश की बदलती गतिशीलता का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।