नई दिल्ली, 1 जून। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के नवीनतम आँकड़े देश में जारी मजबूत आर्थिक गतिविधि और बेहतर अनुपालन की ओर संकेत करते हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा 1 जून को जारी आँकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत बढ़कर 1.66 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह संग्रह आयात पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) में आई वृद्धि से प्रेरित रहा।
आँकड़ों का विवरण
मई के संग्रह में आयात पर आईजीएसटी की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जो बताती है कि घरेलू माँग और आयात गतिविधि दोनों मजबूत बने हुए हैं। सरकार के अनुसार जीएसटी संग्रह में निरंतर वृद्धि औपचारिकीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति, बेहतर कर अनुपालन और स्थिर आर्थिक गतिविधि का परिणाम है। मासिक आधार पर लगातार ऊँचे संग्रह को अप्रत्यक्ष कर प्रणाली की परिपक्वता और कर-आधार के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
एकमुश्त भुगतान का प्रभाव
आँकड़ों की तुलना करते समय एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू को ध्यान में रखना आवश्यक है। मई 2025 में एक दूरसंचार कंपनी द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए किए गए लगभग 10,000 करोड़ रुपये के एकमुश्त भुगतान के कारण उस महीने का आधार ऊँचा था। इस एकमुश्त भुगतान को समायोजित करने पर मई 2026 का सकल जीएसटी संग्रह करीब 9 प्रतिशत और शुद्ध संग्रह करीब 10.1 प्रतिशत अधिक बैठता है। यानी अंतर्निहित वृद्धि शीर्षक आँकड़े से अधिक मजबूत है।
अर्थव्यवस्था के लिए मायने
जीएसटी संग्रह को अर्थव्यवस्था की सेहत का एक महत्वपूर्ण मासिक संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह उपभोग, व्यापार और औद्योगिक गतिविधि को सीधे प्रतिबिंबित करता है। लगातार ऊँचा संग्रह सरकार के लिए राजकोषीय दृष्टि से सकारात्मक है, क्योंकि इससे राजस्व का प्रवाह स्थिर रहता है और बुनियादी ढाँचे तथा कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च के लिए गुंजाइश बनती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मजबूत जीएसटी संग्रह व्यापक आर्थिक वृद्धि के अन्य संकेतकों के अनुरूप है।
विशेषज्ञों की राय
कर विशेषज्ञों का मानना है कि मासिक संग्रह में मामूली उतार-चढ़ाव सामान्य है और इसे किसी एक महीने के आँकड़े के बजाय व्यापक रुझान के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि आयात पर आईजीएसटी में वृद्धि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और घरेलू माँग के बीच के संबंध को दर्शाती है। साथ ही, अनुपालन में सुधार और डेटा-आधारित निगरानी ने कर चोरी पर अंकुश लगाने और संग्रह को स्थिर बनाने में भूमिका निभाई है।