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मई में जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये, सालाना आधार पर 3.2% की वृद्धि; आयात पर आईजीएसटी बढ़ा

वित्त मंत्रालय द्वारा 1 जून को जारी आँकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत बढ़कर 1.66 लाख करोड़ रुपये रहा।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 19 बार देखा
मई में जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये, सालाना आधार पर 3.2% की वृद्धि; आयात पर आईजीएसटी बढ़ा
500 रुपये का भारतीय नोट। मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली, 1 जून। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के नवीनतम आँकड़े देश में जारी मजबूत आर्थिक गतिविधि और बेहतर अनुपालन की ओर संकेत करते हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा 1 जून को जारी आँकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत बढ़कर 1.66 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह संग्रह आयात पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) में आई वृद्धि से प्रेरित रहा।

आँकड़ों का विवरण

मई के संग्रह में आयात पर आईजीएसटी की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जो बताती है कि घरेलू माँग और आयात गतिविधि दोनों मजबूत बने हुए हैं। सरकार के अनुसार जीएसटी संग्रह में निरंतर वृद्धि औपचारिकीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति, बेहतर कर अनुपालन और स्थिर आर्थिक गतिविधि का परिणाम है। मासिक आधार पर लगातार ऊँचे संग्रह को अप्रत्यक्ष कर प्रणाली की परिपक्वता और कर-आधार के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

एकमुश्त भुगतान का प्रभाव

आँकड़ों की तुलना करते समय एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू को ध्यान में रखना आवश्यक है। मई 2025 में एक दूरसंचार कंपनी द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए किए गए लगभग 10,000 करोड़ रुपये के एकमुश्त भुगतान के कारण उस महीने का आधार ऊँचा था। इस एकमुश्त भुगतान को समायोजित करने पर मई 2026 का सकल जीएसटी संग्रह करीब 9 प्रतिशत और शुद्ध संग्रह करीब 10.1 प्रतिशत अधिक बैठता है। यानी अंतर्निहित वृद्धि शीर्षक आँकड़े से अधिक मजबूत है।

अर्थव्यवस्था के लिए मायने

जीएसटी संग्रह को अर्थव्यवस्था की सेहत का एक महत्वपूर्ण मासिक संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह उपभोग, व्यापार और औद्योगिक गतिविधि को सीधे प्रतिबिंबित करता है। लगातार ऊँचा संग्रह सरकार के लिए राजकोषीय दृष्टि से सकारात्मक है, क्योंकि इससे राजस्व का प्रवाह स्थिर रहता है और बुनियादी ढाँचे तथा कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च के लिए गुंजाइश बनती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मजबूत जीएसटी संग्रह व्यापक आर्थिक वृद्धि के अन्य संकेतकों के अनुरूप है।

विशेषज्ञों की राय

कर विशेषज्ञों का मानना है कि मासिक संग्रह में मामूली उतार-चढ़ाव सामान्य है और इसे किसी एक महीने के आँकड़े के बजाय व्यापक रुझान के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि आयात पर आईजीएसटी में वृद्धि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और घरेलू माँग के बीच के संबंध को दर्शाती है। साथ ही, अनुपालन में सुधार और डेटा-आधारित निगरानी ने कर चोरी पर अंकुश लगाने और संग्रह को स्थिर बनाने में भूमिका निभाई है।

संग्रह के घटक और रिफंड

जीएसटी संग्रह कई घटकों से मिलकर बनता है — केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी), राज्य जीएसटी (एसजीएसटी), एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) और उपकर। सकल संग्रह में से निर्यातकों और अन्य पात्र करदाताओं को दिए गए रिफंड घटाने के बाद शुद्ध संग्रह प्राप्त होता है। मई के आँकड़ों में सकल और शुद्ध संग्रह के बीच का अंतर रिफंड प्रवाह को दर्शाता है, जो व्यापार और निर्यात गतिविधि का संकेतक भी है। समय पर रिफंड जारी होना व्यवसायों की कार्यशील पूँजी के लिए महत्वपूर्ण होता है, और सरकार इस प्रक्रिया को डिजिटल और स्वचालित बनाने पर लगातार जोर देती रही है।

कर सुधार की दिशा

जीएसटी प्रणाली अपनी शुरुआत के बाद से निरंतर विकसित होती रही है। कर-स्लैब को सरल बनाने, अनुपालन को आसान करने और तकनीक के माध्यम से चोरी रोकने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। ई-इनवॉइसिंग, डेटा-विश्लेषण और आपूर्ति-शृंखला की निगरानी जैसे उपायों ने संग्रह को अधिक स्थिर और पारदर्शी बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दर-युक्तिकरण और कुछ क्षेत्रों को व्यवस्था में शामिल करने जैसे सुधार आगे भी एजेंडे में रहेंगे, ताकि प्रणाली और कुशल बने तथा करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम हो।

राज्यों का हिस्सा

जीएसटी संग्रह का एक बड़ा हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाता है, इसलिए ऊँचा संग्रह राज्यों की वित्तीय स्थिति के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्थिर और बढ़ता राजस्व राज्यों को अपनी विकास योजनाओं और सामाजिक खर्च को बनाए रखने में मदद करता है। हालाँकि विशेषज्ञ यह भी रेखांकित करते हैं कि कर-दरों की संरचना, छूट और अनुपालन-लागत जैसे मुद्दों पर निरंतर सुधार की आवश्यकता बनी रहती है, ताकि प्रणाली और सरल तथा प्रभावी बने।

आगे क्या

आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह के रुझान पर नजर रखी जाएगी, क्योंकि यह घरेलू माँग, त्योहारी गतिविधि और वैश्विक व्यापार की दिशा को प्रतिबिंबित करेगा। नीति-निर्माताओं के लिए चुनौती यह होगी कि वे संग्रह को मजबूत बनाए रखते हुए कर प्रणाली को और सरल बनाएँ। फिलहाल मई के आँकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित गति बनी हुई है और अप्रत्यक्ष कर संग्रह उसका एक स्थिर स्तंभ बना हुआ है।

स्रोत: Business Today
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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