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रिलायंस जियो का आईपीओ बनेगा भारत का सबसे बड़ा: 2.5% हिस्सेदारी बिक्री से 4 अरब डॉलर से अधिक जुटाने की तैयारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के अनुसार रिलायंस जियो के शेयर जून 2026 तक सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की प्रस्तावित बिक्री से कंपनी 4 अरब डॉलर से अधिक जुटा सकती है, जिससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 35 बार देखा
रिलायंस जियो का आईपीओ बनेगा भारत का सबसे बड़ा: 2.5% हिस्सेदारी बिक्री से 4 अरब डॉलर से अधिक जुटाने की तैयारी
रिलायंस जियो का लोगो। मुकेश अंबानी के अनुसार जियो के शेयर जून 2026 तक सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

मुंबई, 10 जून। देश के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी जोर पकड़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार और डिजिटल सेवा इकाई रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स 2026 में सार्वजनिक निर्गम लाने पर विचार कर रही है, जिसमें कंपनी की लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जा सकती है। चेयरमैन मुकेश अंबानी ने संकेत दिया है कि जियो के शेयर जून 2026 तक सूचीबद्ध होने की उम्मीद है, बशर्ते बाजार नियामकों से सभी आवश्यक मंजूरियाँ समय पर मिल जाएँ।

कितना बड़ा हो सकता है निर्गम

रिपोर्टों के अनुसार 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से कंपनी 4 अरब डॉलर से अधिक जुटा सकती है, जो इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बना देगा। यह 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ से भी बड़ा होगा। मूल्यांकन के मोर्चे पर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं — कुछ रिपोर्टों में जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन लगभग 130 से 170 अरब डॉलर के बीच आँका गया है, जबकि कुछ बैंकरों ने इससे ऊँचे मूल्यांकन का अनुमान भी लगाया है। हालाँकि कंपनी ने अभी कोई निश्चित आँकड़ा तय नहीं किया है।

नियामकीय बदलाव बना आधार

इस आईपीओ की संरचना को संभव बनाने में नियामकीय बदलावों की अहम भूमिका है। नियमों के अनुसार 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनियाँ अब केवल 2.5 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी के साथ सूचीबद्ध हो सकती हैं। इस प्रावधान ने जियो जैसी बड़ी कंपनी को अपेक्षाकृत छोटी हिस्सेदारी बेचकर भी भारी राशि जुटाने और सूचीबद्ध होने का रास्ता खोल दिया है। यही कारण है कि इतनी कम हिस्सेदारी के बावजूद यह निर्गम आकार में रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है।

जियो का सफर

रिलायंस जियो ने पिछले एक दशक में भारत के दूरसंचार और डिजिटल परिदृश्य को बदल दिया है। सस्ती डेटा सेवाओं और व्यापक नेटवर्क के दम पर कंपनी देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं में शामिल हो गई है। डिजिटल भुगतान, मनोरंजन, उपकरण और एंटरप्राइज सेवाओं तक इसके विस्तार ने इसे एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में बदल दिया है। आईपीओ को इसी विशाल कारोबार के सार्वजनिक मूल्यांकन और निवेशकों की व्यापक भागीदारी के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

निवेशकों की दिलचस्पी

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जियो का आईपीओ घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र रहेगा। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ती डिजिटल खपत और कंपनी की बाजार स्थिति इसे एक प्रमुख निवेश अवसर बनाती है। इसके साथ ही, इतने बड़े निर्गम का सफल समापन भारतीय पूँजी बाजार की गहराई और परिपक्वता का भी परीक्षण होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े आईपीओ बाजार में नई पूँजी और भागीदारी आकर्षित करते हैं।

वैश्विक निवेशकों का भरोसा

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में पहले से ही दुनिया के कई बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है। कुछ वर्ष पूर्व कंपनी ने प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों और निजी इक्विटी फंडों से बड़ी पूँजी जुटाई थी, जिसने इसके मूल्यांकन को नई ऊँचाई दी। इन निवेशकों की उपस्थिति आईपीओ के प्रति बाजार के भरोसे को और मजबूत करती है। आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने डिजिटल और दूरसंचार कारोबार के विस्तार, अगली पीढ़ी की नेटवर्क प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी पहलों में कर सकती है, जिन पर समूह आक्रामक रूप से दांव लगा रहा है।

खुदरा निवेशकों की भागीदारी

इतने बड़े आईपीओ में खुदरा निवेशकों की भागीदारी भी एक महत्वपूर्ण पहलू होगी। रिलायंस का नाम और जियो का व्यापक उपभोक्ता आधार इसे आम निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बड़े और चर्चित निर्गम अक्सर पहली बार निवेश करने वालों को भी बाजार की ओर खींचते हैं, जिससे पूँजी बाजार में भागीदारी का दायरा बढ़ता है। हालाँकि वे यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी निर्गम में निवेश का निर्णय केवल ब्रांड के नाम पर नहीं, बल्कि कंपनी की बुनियादी ताकत और मूल्यांकन के आधार पर लिया जाना चाहिए।

जोखिम और चुनौतियाँ

हालाँकि उत्साह अधिक है, विश्लेषक कुछ सावधानियों की ओर भी इशारा करते हैं। आईपीओ का अंतिम आकार, मूल्य-बैंड और समय वैश्विक बाजार की स्थितियों, नियामकीय मंजूरियों और निवेशक धारणा पर निर्भर करेगा। मूल्यांकन को लेकर बाजार में अलग-अलग राय है, और बहुत ऊँचा मूल्यांकन सूचीबद्धता के बाद के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति और दीर्घकालिक संभावनाओं का सावधानीपूर्वक आकलन करने की सलाह दी जा रही है।

आगे क्या

अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि कंपनी अपना मसौदा विवरणिका (डीआरएचपी) कब दाखिल करती है और मूल्यांकन तथा मूल्य-बैंड को लेकर क्या रुख अपनाती है। यदि यह निर्गम योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह न केवल रिलायंस के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा, बल्कि भारतीय पूँजी बाजार के लिए भी एक ऐतिहासिक घटना साबित होगी। आने वाले हफ्तों में निर्गम से जुड़ी अधिक स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।

स्रोत: Business Standard
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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