मुंबई, 10 जून। देश के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी जोर पकड़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार और डिजिटल सेवा इकाई रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स 2026 में सार्वजनिक निर्गम लाने पर विचार कर रही है, जिसमें कंपनी की लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जा सकती है। चेयरमैन मुकेश अंबानी ने संकेत दिया है कि जियो के शेयर जून 2026 तक सूचीबद्ध होने की उम्मीद है, बशर्ते बाजार नियामकों से सभी आवश्यक मंजूरियाँ समय पर मिल जाएँ।
कितना बड़ा हो सकता है निर्गम
रिपोर्टों के अनुसार 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से कंपनी 4 अरब डॉलर से अधिक जुटा सकती है, जो इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बना देगा। यह 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ से भी बड़ा होगा। मूल्यांकन के मोर्चे पर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं — कुछ रिपोर्टों में जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन लगभग 130 से 170 अरब डॉलर के बीच आँका गया है, जबकि कुछ बैंकरों ने इससे ऊँचे मूल्यांकन का अनुमान भी लगाया है। हालाँकि कंपनी ने अभी कोई निश्चित आँकड़ा तय नहीं किया है।
नियामकीय बदलाव बना आधार
इस आईपीओ की संरचना को संभव बनाने में नियामकीय बदलावों की अहम भूमिका है। नियमों के अनुसार 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनियाँ अब केवल 2.5 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी के साथ सूचीबद्ध हो सकती हैं। इस प्रावधान ने जियो जैसी बड़ी कंपनी को अपेक्षाकृत छोटी हिस्सेदारी बेचकर भी भारी राशि जुटाने और सूचीबद्ध होने का रास्ता खोल दिया है। यही कारण है कि इतनी कम हिस्सेदारी के बावजूद यह निर्गम आकार में रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है।
जियो का सफर
रिलायंस जियो ने पिछले एक दशक में भारत के दूरसंचार और डिजिटल परिदृश्य को बदल दिया है। सस्ती डेटा सेवाओं और व्यापक नेटवर्क के दम पर कंपनी देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं में शामिल हो गई है। डिजिटल भुगतान, मनोरंजन, उपकरण और एंटरप्राइज सेवाओं तक इसके विस्तार ने इसे एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में बदल दिया है। आईपीओ को इसी विशाल कारोबार के सार्वजनिक मूल्यांकन और निवेशकों की व्यापक भागीदारी के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
निवेशकों की दिलचस्पी
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जियो का आईपीओ घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र रहेगा। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ती डिजिटल खपत और कंपनी की बाजार स्थिति इसे एक प्रमुख निवेश अवसर बनाती है। इसके साथ ही, इतने बड़े निर्गम का सफल समापन भारतीय पूँजी बाजार की गहराई और परिपक्वता का भी परीक्षण होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े आईपीओ बाजार में नई पूँजी और भागीदारी आकर्षित करते हैं।