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भारतीय बाज़ारों में तेज़ गिरावट: निफ्टी 515 अंक, सेंसेक्स 1,950 अंक टूटा

तीन कारोबारी सत्रों में बाज़ार लगभग ढाई फीसदी टूटे। भारत-पाकिस्तान तनाव की वर्षगांठ और वैश्विक मुद्राओं में अस्थिरता के बीच विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली।

राहुल शर्मा राहुल शर्मा 11 मई 2026, 01:48 AM 1 मिनट में पढ़ें 22 बार देखा
भारतीय बाज़ारों में तेज़ गिरावट: निफ्टी 515 अंक, सेंसेक्स 1,950 अंक टूटा
दलाल स्ट्रीट पर बाज़ार की लाल स्क्रीन।

मुंबई, 11 मई। भारतीय शेयर बाज़ारों ने पिछले तीन कारोबारी सत्रों में तेज़ गिरावट दर्ज की। 7 मई से शुरू हुए सिलसिले में निफ्टी 2 प्रतिशत से अधिक यानी लगभग 515 अंक गिर गया, जबकि सेंसेक्स 1,950 अंक या 2.5 प्रतिशत टूटा।

क्षेत्रवार गिरावट

आईटी, बैंकिंग और रियल एस्टेट सूचकांकों में सबसे ज़्यादा बिकवाली देखी गई। निफ्टी बैंक 3.2%, निफ्टी आईटी 4.1%, और निफ्टी रियल्टी 3.8% गिरा। फार्मा और एफएमसीजी क्षेत्र अपेक्षाकृत स्थिर रहे क्योंकि निवेशक रक्षात्मक शेयरों की ओर बढ़े।

FPI की लगातार बिकवाली

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इन तीन सत्रों में लगभग 18,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 11,500 करोड़ रुपए की ख़रीदारी से थोड़ी राहत दी, लेकिन वे पूरी तरह FPI निकासी की भरपाई नहीं कर सके।

तनाव और जिओपॉलिटिक्स

गिरावट भारत-पाकिस्तान तनाव की वर्षगांठ की पृष्ठभूमि में आई। हालांकि, विश्लेषक इसे प्रमुख कारण नहीं मानते। उनके अनुसार वैश्विक डॉलर मज़बूती, अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड का बढ़ना, और कच्चे तेल की क़ीमतें इस बार ज्यादा निर्णायक हैं।

आरबीआई का आशावादी अनुमान

इस बीच, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.9 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है। 11-15 मई के सप्ताह में सीपीआई मुद्रास्फीति, बैंकिंग आंकड़े और व्यापार डेटा जारी होंगे, जो बाज़ार की दिशा तय करेंगे।

क्या करें निवेशक

म्यूचुअल फंड प्रबंधकों की राय है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह "स्टैगर्ड एंट्री" का अवसर है। एसआईपी जारी रखने और गुणवत्ता वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश को सलाह दी जा रही है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को सावधानी से रहने को कहा गया है।

स्रोत: Pulse by Zerodha
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राहुल शर्मा
द्वारा लिखित
राहुल शर्मा
Senior Political Correspondent

वरिष्ठ संवाददाता, राजनीति और संसदीय कार्य के विशेषज्ञ। दिल्ली ब्यूरो से जुड़े हुए, राष्ट्रीय राजनीति की हर हलचल पर पैनी नज़र रखते हैं।

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