रुड़की, 12 जून। देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश इम्तिहान—जेईई एडवांस्ड 2026—का परिणाम आईआईटी रुड़की ने 1 जून 2026 की तड़के घोषित कर दिया। निर्धारित समय से पहले, सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर जारी हुए नतीजों में बिहार के शुभम कुमार ने 360 में से 330 अंक लेकर ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) 1 हासिल की। परिणाम के साथ आईआईटी रुड़की ने फ़ाइनल आंसर-की और टॉपर्स की सूची भी जारी की। हर साल यह परिणाम देश भर के लाखों परिवारों के लिए महीनों की मेहनत का निर्णायक क्षण होता है।
इस साल परीक्षा 17 मई 2026 को हुई थी। दोनों पेपरों में शामिल हुए कुल 1,79,694 अभ्यर्थियों में से 56,880 ने परीक्षा पास की। अभ्यर्थी अपने आवेदन क्रमांक और जन्मतिथि के ज़रिए jeeadv.ac.in पर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। परिणाम के साथ ही श्रेणीवार और ज़ोनवार रैंक सूची भी सामने आई, जिससे काउंसलिंग की दिशा तय होती है।
टॉपर्स कौन रहे
एआईआर-1 हासिल करने वाले शुभम कुमार आईआईटी दिल्ली ज़ोन से हैं। लड़कियों में सबसे ऊँची रैंक आरोही देशपांडे की रही, जिन्होंने 280 अंक लेकर कॉमन रैंक लिस्ट (सीआरएल) में 77वाँ स्थान पाया। टॉपर्स की यह सूची हर साल देश भर के कोचिंग संस्थानों, स्कूलों और परिवारों के लिए प्रेरणा बनती है, क्योंकि जेईई एडवांस्ड में सफलता सीधे आईआईटी में दाख़िले का रास्ता खोलती है। टॉपर्स की कहानियाँ बताती हैं कि निरंतर अभ्यास और अवधारणाओं की स्पष्टता ही असली कुंजी है।
जेईई एडवांस्ड का महत्व
जेईई एडवांस्ड भारत की 23 आईआईटी में बीटेक, इंटीग्रेटेड एमटेक और दोहरी डिग्री पाठ्यक्रमों में दाख़िले का द्वार है। इसमें वही अभ्यर्थी बैठ सकते हैं जो पहले जेईई मेन की निर्धारित कटऑफ़ पार कर चुके हों। यही दो-स्तरीय व्यवस्था इस परीक्षा को बेहद प्रतिस्पर्धी बनाती है—लाखों छात्र जेईई मेन देते हैं, उनमें से शीर्ष दो लाख के आसपास एडवांस्ड के लिए पात्र होते हैं, और अंतत: कुछ हज़ार को ही आईआईटी की सीट मिलती है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है।
अब आगे: जोसा काउंसलिंग
परिणाम के बाद सबसे अहम पड़ाव है जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (जोसा) की काउंसलिंग। इसी प्रक्रिया के ज़रिए आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और अन्य केंद्र-वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (जीएफटीआई) की सीटें आवंटित होती हैं। अभ्यर्थियों को अपनी रैंक के आधार पर संस्थान और शाखा के विकल्प भरने होते हैं, और कई राउंड में सीट आवंटन होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छात्र केवल ब्रांड के पीछे न भागें, बल्कि शाखा, रुचि और भविष्य की संभावनाओं को संतुलित रखकर चुनाव करें। हर राउंड में सीट स्वीकार करने, अपग्रेड चुनने या छोड़ने के विकल्प को समझदारी से इस्तेमाल करना ज़रूरी है।