नई दिल्ली, 12 जून। विदेश में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएँ 2026 में तेज़ी से बदल रही हैं। वर्षों तक जो छात्र अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया को पहली पसंद मानते थे, वे अब जर्मनी, आयरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे विकल्पों की ओर रुख़ कर रहे हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है—पारंपरिक गंतव्यों में वीज़ा और आव्रजन नियमों का सख़्त होना, बढ़ती लागत और पढ़ाई के बाद काम करने के घटते अवसर। यह रुझान भारतीय परिवारों के बदलते नज़रिए को भी दर्शाता है।
आँकड़े इस रुझान की पुष्टि करते हैं। जहाँ सख़्त वीज़ा नियमों और ऊँची लागत के चलते 2024 में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट देखी गई, वहीं जर्मनी ने इसी दौरान बढ़त दर्ज की। जर्मनी में भारतीय छात्रों की दिलचस्पी 2022 के 13.2 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 32 प्रतिशत से ऊपर पहुँच गई है। यह छलांग किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई व्यावहारिक पहलुओं के मेल से आई है।
जर्मनी ही क्यों
जर्मनी के आकर्षण की जड़ें ठोस हैं। वहाँ के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फ़ीस या तो बहुत कम है या नहीं के बराबर, और इंजीनियरिंग, आईटी, डेटा साइंस तथा हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में दुनिया-स्तरीय कार्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके साथ ही जर्मनी का मज़बूत श्रम बाज़ार और स्नातक के बाद 18 महीने का पोस्ट-स्टडी वर्क वीज़ा छात्रों को नौकरी तलाशने का व्यावहारिक अवसर देता है। यही 'पढ़ाई से रोज़गार' तक का स्पष्ट रास्ता इसे आकर्षक बनाता है। जर्मनी का मज़बूत औद्योगिक आधार, ख़ासकर ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग क्षेत्र, कुशल स्नातकों के लिए अवसरों से भरा है।
निर्णय का नया पैमाना: रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट
विशेषज्ञ बताते हैं कि 2026 में छात्र और परिवार अब केवल किसी देश के 'ब्रांड' से प्रभावित नहीं होते। पारदर्शिता, किफ़ायत और निवेश पर प्रतिफल (आरओआई)—ये तीन कसौटियाँ निर्णय के केंद्र में आ गई हैं। करियर के नतीजे, दीर्घकालिक स्थिरता और दाख़िले की स्पष्ट प्रक्रिया अब उतनी ही अहम हैं जितनी संस्थान की प्रतिष्ठा। यही कारण है कि कम फ़ीस और बेहतर वर्क-वीज़ा नीति वाले देश आगे निकल रहे हैं। महँगी पढ़ाई पर भारी क़र्ज़ लेने के बजाय परिवार अब ऐसे विकल्प चुन रहे हैं जहाँ ख़र्च और रिटर्न का संतुलन बेहतर हो।
2026 के वीज़ा बदलाव
जर्मनी ने 2026 में अपनी अध्ययन-वीज़ा प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए हैं, जिनका मक़सद वास्तविक छात्रों के लिए रास्ता आसान बनाना और प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी करना है। छात्रों को सलाह है कि वे ब्लॉक्ड अकाउंट, स्वास्थ्य बीमा, भाषा प्रमाणपत्र और शैक्षणिक दस्तावेज़ों की आवश्यकताओं को पहले से समझ लें। आयरलैंड और यूएई भी स्पष्ट वीज़ा-नीति और रोज़गार के अवसरों के कारण उभरते विकल्प बने हैं। यूएई की निकटता और सांस्कृतिक परिचितता भारतीय छात्रों को अतिरिक्त सुविधा देती है, जबकि आयरलैंड अपने टेक और फ़ार्मा उद्योग के लिए जाना जाता है।