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यूजीसी नेट जून 2026: 22 से 30 जून तक परीक्षा, 85 विषयों में सीबीटी; जानें पूरा शेड्यूल

एनटीए ने यूजीसी नेट जून 2026 का विषयवार शेड्यूल जारी कर दिया है। परीक्षा 22 से 30 जून तक दो पालियों में होगी; सिटी स्लिप परीक्षा से 8-10 दिन पहले उपलब्ध होगी।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 34 बार देखा
यूजीसी नेट जून 2026: 22 से 30 जून तक परीक्षा, 85 विषयों में सीबीटी; जानें पूरा शेड्यूल
यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा 22 से 30 जून तक सीबीटी मोड में होगी।

नई दिल्ली, 12 जून। असिस्टेंट प्रोफ़ेसर बनने की पात्रता, जूनियर रिसर्च फ़ेलोशिप (जेआरएफ़) और पीएचडी प्रवेश—तीनों के लिए निर्णायक मानी जाने वाली यूजीसी नेट परीक्षा का जून 2026 सत्र नज़दीक आ गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने विषयवार शेड्यूल जारी करते हुए घोषणा की है कि यह परीक्षा 22 जून से 30 जून 2026 तक कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में देश भर के केंद्रों पर आयोजित होगी। उच्च शिक्षा और शोध में करियर के इच्छुक लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण है।

इस बार परीक्षा कुल 85 विषयों में कराई जा रही है। हर दिन दो पालियों में परीक्षा होगी—पहली पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक। प्रत्येक पेपर की अवधि 180 मिनट (तीन घंटे) होगी, और पेपर-1 व पेपर-2 के बीच कोई ब्रेक नहीं होगा। यानी अभ्यर्थियों को तीन घंटे लगातार एकाग्रता बनाए रखनी होगी।

परीक्षा का स्वरूप

यूजीसी नेट में दो पेपर होते हैं जो एक ही सत्र में लिए जाते हैं। पेपर-1 सामान्य अभिक्षमता (जनरल एप्टीट्यूड) का होता है, जो शोध-अभिवृत्ति, शिक्षण योग्यता, तार्किक क्षमता और सामान्य जागरूकता को परखता है। पेपर-2 अभ्यर्थी के चुने हुए विषय पर केंद्रित होता है। दोनों पेपर बहुविकल्पीय (एमसीक्यू) होते हैं और इनमें नकारात्मक अंकन नहीं होता—यानी ग़लत उत्तर पर अंक नहीं कटते, जो अभ्यर्थियों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। इसका मतलब है कि हर प्रश्न का प्रयास करना फ़ायदेमंद हो सकता है।

सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड

एनटीए ने बताया है कि परीक्षा शहर की सूचना देने वाली सिटी इंटिमेशन स्लिप परीक्षा तिथि से लगभग 8 से 10 दिन पहले उपलब्ध करा दी जाती है। 22 जून को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी अपने शहर का आवंटन 12 से 14 जून के बीच आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in पर देख सकते हैं। एडमिट कार्ड इसके कुछ दिन बाद जारी होता है। अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट देखते रहें और सिटी स्लिप मिलते ही यात्रा व ठहरने की योजना बना लें, ताकि परीक्षा वाले दिन कोई अफ़रा-तफ़री न हो।

नेट के तीन उद्देश्य

यूजीसी नेट का परिणाम तीन श्रेणियों में आता है—केवल असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पात्रता, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के साथ जेआरएफ़, और पीएचडी प्रवेश के लिए पात्रता। हाल के वर्षों में नेट स्कोर को पीएचडी दाख़िले से जोड़ने का बड़ा बदलाव हुआ है, जिससे यह परीक्षा शोध की दुनिया में प्रवेश का और भी अहम पड़ाव बन गई है। जेआरएफ़ हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को शोध के दौरान मासिक फ़ेलोशिप मिलती है, इसलिए प्रतिस्पर्धा बहुत तीखी रहती है। अब एक ही परीक्षा से तीन रास्ते खुलते हैं, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।

तैयारी की रणनीति

विशेषज्ञ मानते हैं कि पेपर-1 अक्सर निर्णायक साबित होता है, क्योंकि इसमें अंक बटोरना तुलनात्मक रूप से आसान होता है और इसका पाठ्यक्रम सीमित व पूर्वानुमेय है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करना, समय-प्रबंधन का अभ्यास और अपने विषय की मानक पुस्तकों की गहराई से तैयारी—यही तीन स्तंभ सफलता दिलाते हैं। चूँकि परीक्षा सीबीटी मोड में है, इसलिए ऑनलाइन मॉक टेस्ट देकर स्क्रीन पर पढ़ने और उत्तर देने का अभ्यास भी ज़रूरी है। अंतिम दिनों में नए विषय शुरू करने के बजाय रिवीज़न पर ध्यान देना अधिक लाभकारी रहता है।

पात्रता और साल में दो मौके

यूजीसी नेट के लिए सामान्यत: संबंधित विषय में कम-से-कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर डिग्री आवश्यक होती है, जबकि आरक्षित वर्गों को अंकों में छूट मिलती है। जेआरएफ़ के लिए आयु-सीमा भी निर्धारित है, हालाँकि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पात्रता के लिए कोई ऊपरी आयु-सीमा नहीं है। एक बड़ी सुविधा यह है कि यह परीक्षा साल में दो बार—जून और दिसंबर सत्र में—आयोजित होती है, जिससे अभ्यर्थियों को एक से अधिक अवसर मिलते हैं। एक बार नेट उत्तीर्ण करने के बाद पात्रता आजीवन मान्य रहती है, इसलिए कई अभ्यर्थी अपनी रैंक सुधारने या जेआरएफ़ पाने के लिए दोबारा भी परीक्षा देते हैं। यह लचीलापन परीक्षा को अधिक समावेशी और अवसरपूर्ण बनाता है।

आगे क्या

परीक्षा संपन्न होने के बाद एनटीए प्रोविजनल आंसर-की जारी करता है, फिर आपत्तियाँ ली जाती हैं और अंतत: परिणाम घोषित होता है। हर विषय और श्रेणी के लिए अलग कटऑफ़ तय होती है, और शीर्ष 6 प्रतिशत अभ्यर्थियों को ही उत्तीर्ण घोषित किया जाता है। जेआरएफ़ के लिए कटऑफ़ और भी ऊँची रहती है। उच्च शिक्षा और शोध में करियर बनाने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए जून का यह सत्र एक बड़ा अवसर है, और सुनियोजित तैयारी ही इस अवसर को सफलता में बदल सकती है।

स्रोत: Adda247
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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