मुख्य सामग्री पर जाएँ
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
जन जागरण
ब्रेकिंग
री-नीट यूजी 2026: 21 जून को दोबारा परीक्षा, 22 लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों के लिए क्या बदला भीषण गर्मी का कहर: तेलंगाना में लू से 16 लोगों की मौत, कई शहरों में पारा 45 डिग्री के पार फीफा विश्व कप: विनीसियस के गोल से ब्राज़ील ने मोरक्को से 1-1 की बराबरी छुड़ाई स्टेनली कप फाइनल: हरिकेन्स ने गोल्डन नाइट्स पर बनाई 3-2 की बढ़त, खिताब से एक जीत दूर न्यूयॉर्क निक्स ने 53 साल बाद रचा इतिहास, ब्रंसन के 45 अंकों से जीता NBA खिताब विमान ईंधन की मार से एयरलाइनों को राहत: कैबिनेट ने मंजूर किया 10,000 करोड़ का एटीएफ स्थिरीकरण कोष गृहिणियाँ 'राष्ट्र निर्माता' हैं: सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू श्रम का मूल्य कम से कम 30,000 रुपये मासिक आँका अमेरिकी हमले में तेन दे अरागुआ गिरोह का सरगना ढेर: ट्रंप का दावा, वेनेजुएला के सहयोग से हुई कार्रवाई फीफा विश्व कप 2026 का भव्य आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया, तीन लाल कार्ड का बना इतिहास फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 1990 के बाद सबसे ताकतवर
स्वास्थ्य

भारत में बच्चों में मधुमेह की देखभाल के लिए पहला राष्ट्रीय फ्रेमवर्क जारी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने "बच्चों में मधुमेह पर मार्गदर्शन दस्तावेज़" 3 मई को जारी किया। 0-18 वर्ष के बच्चों के लिए "4Ts" जागरूकता ढांचा और मुफ़्त इंसुलिन प्रदान।

राहुल शर्मा राहुल शर्मा 08 मई 2026, 07:00 PM 1 मिनट में पढ़ें 20 बार देखा
भारत में बच्चों में मधुमेह की देखभाल के लिए पहला राष्ट्रीय फ्रेमवर्क जारी
बच्चे में ग्लूकोज़ की जांच।

नई दिल्ली, 3 मई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 मई 2026 को "बच्चों में मधुमेह मेलिटस पर मार्गदर्शन दस्तावेज़" जारी किया। यह देश का पहला राष्ट्रीय फ्रेमवर्क है जो विशेष रूप से 0-18 वर्ष के बच्चों में मधुमेह की देखभाल पर केंद्रित है।

स्क्रीनिंग से लेकर प्रबंधन तक

दस्तावेज़ बच्चों में मधुमेह की स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन के सभी पहलुओं को कवर करता है। इसमें टाइप-1 और टाइप-2 दोनों मधुमेह के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल हैं — जो भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में अब तक अनुपस्थित थे।

"4Ts" जागरूकता ढांचा

दस्तावेज़ टाइप-1 मधुमेह के शुरुआती पता लगाने के लिए "4Ts" फ्रेमवर्क को बढ़ावा देता है: टॉयलेट (बार-बार पेशाब), थर्स्टी (अत्यधिक प्यास), टायर्ड (थकान) और थिनर (अस्पष्टीकृत वजन घटना)। इन लक्षणों को पहचानकर माता-पिता तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

निःशुल्क देखभाल पैकेज

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर निःशुल्क देखभाल पैकेज में आजीवन इंसुलिन, ग्लूकोमीटर और टेस्ट स्ट्रिप्स शामिल हैं। यह उन परिवारों के लिए विशेष राहत है जहां बच्चे को टाइप-1 मधुमेह का सामना है — जिसकी आजीवन उपचार लागत 5-7 लाख रुपए तक होती है।

भारत में बढ़ती चिंता

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, भारत में लगभग 2,30,000 बच्चे और किशोर टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं — विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा। टाइप-2 डायबिटीज के मामले भी मोटापे और जीवनशैली परिवर्तनों के साथ बढ़ रहे हैं।

शिखर सम्मेलन पर अनावरण

दस्तावेज़ को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में सर्वोत्तम प्रथाओं पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में अनावरण किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "हम अपने बच्चों को मधुमेह की दुनिया का बोझ नहीं उठाने देंगे — रोकथाम और देखभाल हमारी प्राथमिकता है।"

आयुष्मान भारत के तहत एकीकरण

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, मधुमेह देखभाल पैकेज को आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत एकीकृत किया जाएगा, जिससे 50 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच हो सकेगी।

स्रोत: The Week
शेयर: Facebook Twitter WhatsApp
राहुल शर्मा
द्वारा लिखित
राहुल शर्मा
Senior Political Correspondent

वरिष्ठ संवाददाता, राजनीति और संसदीय कार्य के विशेषज्ञ। दिल्ली ब्यूरो से जुड़े हुए, राष्ट्रीय राजनीति की हर हलचल पर पैनी नज़र रखते हैं।

के सभी लेख देखें राहुल शर्मा →

टिप्पणियाँ (0)

रोज़ की मुख्य खबरों से जुड़े रहें

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और कोई खबर न चूकें।