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स्वास्थ्य

भारत का स्वदेशी HPV टेस्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा: सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ी सफलता

एम्स नई दिल्ली और आईसीएमआर के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन में भारत के पहले स्वदेशी HPV डीएनए टेस्ट को सर्वाइकल कैंसर जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा पाया गया है, जो कम संसाधन वाले देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 17 बार देखा
भारत का स्वदेशी HPV टेस्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा: सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ी सफलता
एक नैदानिक प्रयोगशाला, जहां भारत के स्वदेशी HPV टेस्ट जैसे परीक्षण सर्वाइकल कैंसर की जांच को सुलभ बना रहे हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली, 12 जून 2026। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश के पहले स्वदेशी HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) डीएनए टेस्ट को सफलतापूर्वक मान्य किया गया है, जो सर्वाइकल कैंसर जांच के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है। यह सफलता एम्स नई दिल्ली, आईसीएमआर के विभिन्न संस्थानों और विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर अनुसंधान एजेंसी के बीच सहयोग का परिणाम है। यह अध्ययन 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर' में प्रकाशित हुआ है।

कौन से टेस्ट को मिली मान्यता

इस अध्ययन में मॉलबायो डायग्नोस्टिक्स के 'ट्रूनैट HPV-HR प्लस' टेस्ट को अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) द्वारा निर्धारित मान्यता मानदंडों पर खरा पाया गया। IARC विश्व स्वास्थ्य संगठन की विशेष कैंसर अनुसंधान एजेंसी है। कुल मिलाकर चार पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट का मूल्यांकन किया गया, जिनमें से दो को राष्ट्रीय कार्यक्रम में उपयोग के लिए उपयुक्त पाया गया। यह भारत की सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन की कोशिशों के लिए एक बड़ा कदम है।

क्या है इस टेस्ट की खासियत

इस स्वदेशी टेस्ट की सबसे बड़ी खूबी इसकी सटीकता और किफायती होना है। यह टेस्ट 8 उच्च-जोखिम वाले HPV प्रकारों को लक्षित करता है। इस सीमित लेकिन केंद्रित दृष्टिकोण के कारण यह उन क्षणिक और कम-जोखिम वाले संक्रमणों का पता लगाने से बचता है, जिन्हें 14 प्रकारों का पता लगाने वाले टेस्ट अक्सर पकड़ लेते हैं। इसने 0.99 की असाधारण सापेक्ष नैदानिक विशिष्टता बनाए रखी, जिससे अनावश्यक द्वितीयक रेफरल, महंगी ओवर-ट्राइएज और मरीजों की चिंता में भारी कमी आने की संभावना है।

सहयोगी संस्थान

यह अध्ययन कई प्रमुख भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से किया गया। इनमें एम्स नई दिल्ली, आईसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान, आईसीएमआर-राष्ट्रीय प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी, और भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद शामिल हैं। यह व्यापक सहयोग इस अध्ययन की विश्वसनीयता को रेखांकित करता है और दर्शाता है कि भारतीय अनुसंधान संस्थान वैश्विक मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं।

क्यों है यह महत्वपूर्ण

सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण समय पर जांच और निदान की कमी है। अब तक देश में सर्वाइकल कैंसर की जांच की पहुंच सीमित रही है, खासकर ग्रामीण और कम संसाधन वाले इलाकों में। एक किफायती और भरोसेमंद स्वदेशी टेस्ट के विकास से इस अंतर को पाटने में मदद मिल सकती है। यह टेस्ट विशेष रूप से 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को लक्षित करता है, जो इस बीमारी के सबसे अधिक जोखिम वाले समूह में आती हैं।

कम संसाधन वाले देशों के लिए मॉडल

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह मान्य HPV टेस्ट सिर्फ देश के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के अन्य कम संसाधन वाले देशों के लिए भी सर्वाइकल कैंसर जांच का एक मॉडल बन सकता है। पॉइंट-ऑफ-केयर तकनीक का अर्थ है कि इस टेस्ट को बड़ी प्रयोगशालाओं की जरूरत के बिना, स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी किया जा सकता है। इससे जांच की पहुंच उन इलाकों तक भी बढ़ सकती है जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। यह 'मेक इन इंडिया' पहल की एक बड़ी सफलता भी है।

टीकाकरण और जांच का मेल

सर्वाइकल कैंसर उन कुछ कैंसरों में से एक है जिसे रोकथाम और समय पर जांच से लगभग समाप्त किया जा सकता है। एक ओर HPV टीकाकरण कार्यक्रम युवा लड़कियों को संक्रमण से बचा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह स्वदेशी जांच वयस्क महिलाओं में बीमारी का जल्दी पता लगाने में मदद करेगी। दोनों रणनीतियों का मेल भारत को सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने में सहायता कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन को एक वैश्विक प्राथमिकता घोषित किया है।

स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

अपने नैदानिक महत्व से परे, एक स्वदेशी HPV टेस्ट की मान्यता भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए रणनीतिक महत्व भी रखती है। वर्षों तक देश आयातित जांच किटों पर निर्भर रहा, जो अक्सर महंगी होती थीं और एक अरब से अधिक की आबादी के लिए उन्हें उपलब्ध कराना कठिन था। एक स्थानीय रूप से विकसित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य टेस्ट इस निर्भरता को कम करता है और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करता है। यह भारतीय कंपनियों को अन्य विकासशील देशों को किफायती समाधान निर्यात करने का अवसर भी देता है।

आगे क्या

अब इस स्वदेशी HPV टेस्ट को राष्ट्रीय सर्वाइकल कैंसर जांच कार्यक्रम में व्यापक रूप से शामिल किए जाने की उम्मीद है। यह सफलता भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और मजबूत कदम है। अगर इस टेस्ट को देशव्यापी स्तर पर सही तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में यह हजारों महिलाओं की जान बचाने और सर्वाइकल कैंसर के बोझ को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही जन-जागरूकता और जांच को बढ़ावा देना भी उतना ही जरूरी होगा।

स्रोत: BioSpectrum India
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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