मुख्य सामग्री पर जाएँ
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
जन जागरण
ब्रेकिंग
री-नीट यूजी 2026: 21 जून को दोबारा परीक्षा, 22 लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों के लिए क्या बदला भीषण गर्मी का कहर: तेलंगाना में लू से 16 लोगों की मौत, कई शहरों में पारा 45 डिग्री के पार फीफा विश्व कप: विनीसियस के गोल से ब्राज़ील ने मोरक्को से 1-1 की बराबरी छुड़ाई स्टेनली कप फाइनल: हरिकेन्स ने गोल्डन नाइट्स पर बनाई 3-2 की बढ़त, खिताब से एक जीत दूर न्यूयॉर्क निक्स ने 53 साल बाद रचा इतिहास, ब्रंसन के 45 अंकों से जीता NBA खिताब विमान ईंधन की मार से एयरलाइनों को राहत: कैबिनेट ने मंजूर किया 10,000 करोड़ का एटीएफ स्थिरीकरण कोष गृहिणियाँ 'राष्ट्र निर्माता' हैं: सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू श्रम का मूल्य कम से कम 30,000 रुपये मासिक आँका अमेरिकी हमले में तेन दे अरागुआ गिरोह का सरगना ढेर: ट्रंप का दावा, वेनेजुएला के सहयोग से हुई कार्रवाई फीफा विश्व कप 2026 का भव्य आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया, तीन लाल कार्ड का बना इतिहास फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 1990 के बाद सबसे ताकतवर
स्वास्थ्य

अवसाद की पहचान अब खून की जांच से? नए अध्ययन में इम्यून कोशिकाओं की उम्र से जुड़ा सुराग

एक नए अध्ययन के अनुसार, भविष्य में अवसाद (डिप्रेशन) की पहचान एक साधारण रक्त जांच से संभव हो सकती है — कुछ खास इम्यून (प्रतिरक्षा) कोशिकाओं की उम्र बढ़ने के तरीके को ट्रैक करके।

प्रिया पटेल प्रिया पटेल 24 मई 2026, 12:26 AM 1 मिनट में पढ़ें 42 बार देखा
अवसाद की पहचान अब खून की जांच से? नए अध्ययन में इम्यून कोशिकाओं की उम्र से जुड़ा सुराग
मानसिक स्वास्थ्य की वस्तुनिष्ठ पहचान की ओर नया कदम (प्रतीकात्मक चित्र)।

नई दिल्ली, मई। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक दिलचस्प शोध सामने आया है, जो अवसाद की जल्द पहचान की दिशा में नई संभावनाएं खोल सकता है।

खून की जांच से सुराग

एक नए अध्ययन के अनुसार, अवसाद को भविष्य में एक साधारण रक्त जांच के जरिए पहचाना जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाओं (इम्यून सेल्स) के "बूढ़े" होने के तरीके पर नजर रखकर अवसाद से जुड़े संकेत मिल सकते हैं।

यह क्यों मायने रखता है

अवसाद की पहचान आमतौर पर लक्षणों और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर होती है, जो व्यक्तिपरक हो सकती है। एक वस्तुनिष्ठ जैविक मार्कर (बायोमार्कर) मिलने से बीमारी की जल्द और सटीक पहचान संभव हो सकती है, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।

सावधानी भी जरूरी

विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यह अभी प्रारंभिक चरण का शोध है और इसे व्यापक नैदानिक परीक्षणों से गुजरना होगा। फिर भी, मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य की तरह वस्तुनिष्ठ रूप से मापने की दिशा में यह एक उत्साहजनक कदम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे शोध भविष्य में अवसाद के इलाज और जागरूकता दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

स्रोत: Medical research coverage
शेयर: Facebook Twitter WhatsApp
प्रिया पटेल
द्वारा लिखित
प्रिया पटेल
Sports Correspondent

खेल पत्रकार, क्रिकेट और ओलंपिक खेलों की कवरेज में विशेषज्ञ। एशियाई खेलों और विश्व कप जैसे प्रमुख टूर्नामेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव।

के सभी लेख देखें प्रिया पटेल →

टिप्पणियाँ (0)

रोज़ की मुख्य खबरों से जुड़े रहें

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और कोई खबर न चूकें।