नई दिल्ली, 12 जून 2026। दशकों तक भारत में डेंगू का प्रकोप एक तय चक्र में चलता था, जिसमें मानसून के दौरान मामले बढ़ते, भारी बारिश के बाद चरम पर पहुंचते और फिर तापमान गिरने के साथ कम हो जाते थे। लेकिन अब यह पैटर्न तेजी से बदल रहा है। इस साल मानसून का मौसम आधिकारिक रूप से शुरू होने से पहले ही फरवरी 2026 के अंत तक देश में डेंगू के 6,927 मामले दर्ज किए जा चुके थे, जो असामान्य रूप से जल्दी फैलाव का संकेत है।
राज्यवार स्थिति
इस साल के शुरुआती आंकड़ों में तमिलनाडु सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा, जहां 2,873 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 786, केरल में 670 और कर्नाटक में 560 मामले सामने आए। चिंता की बात यह है कि मानसून शुरू होने से पहले ही कई शहरों के अस्पतालों में संदिग्ध डेंगू के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई, जो दर्शाता है कि बीमारी का मौसमी चरित्र अब बदल रहा है। यह बदलाव स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक नई चुनौती है।
क्यों बदल रहा है पैटर्न
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते तापमान और अनियमित बारिश के कारण मच्छर अब लंबे समय तक जीवित रह पा रहे हैं। महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज में सामुदायिक चिकित्सा के प्रोफेसर डॉ. हर्षदीप जोशी ने कहा कि डेंगू अब मानसून के बाद की अवधि तक सीमित नहीं रहा और इसके संक्रमण का दायरा बढ़ता दिख रहा है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान, 60 से 78 प्रतिशत के बीच आर्द्रता और मध्यम बारिश डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं।
वायु प्रदूषण से भी जुड़ाव
2026 के एक पर्यावरण प्रदूषण अध्ययन में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। अध्ययन में पाया गया कि जिन देशों में PM2.5 प्रदूषण का स्तर अधिक था, वहां डेंगू से होने वाली मृत्यु दर साफ-सुथरे इलाकों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक थी। यह निष्कर्ष भारत जैसे देश के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां कई शहर पहले से ही गंभीर वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की कई चुनौतियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।
चिकनगुनिया का खतरा भी
डेंगू के साथ-साथ चिकनगुनिया भी एक उभरते हुए खतरे के रूप में सामने आ रहा है, जिस पर बढ़ी हुई निगरानी रखी जा रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत चिकनगुनिया का सबसे बड़ा बोझ उठाने वाला देश बना हुआ है, जहां 2025 में इसके 34,876 संदिग्ध और पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे। ये मच्छर जनित बीमारियां मिलकर देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव डाल रही हैं, खासकर तब जब इनके संक्रमण का मौसम आपस में ओवरलैप करता है।