मुख्य सामग्री पर जाएँ
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
जन जागरण
ब्रेकिंग
री-नीट यूजी 2026: 21 जून को दोबारा परीक्षा, 22 लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों के लिए क्या बदला भीषण गर्मी का कहर: तेलंगाना में लू से 16 लोगों की मौत, कई शहरों में पारा 45 डिग्री के पार फीफा विश्व कप: विनीसियस के गोल से ब्राज़ील ने मोरक्को से 1-1 की बराबरी छुड़ाई स्टेनली कप फाइनल: हरिकेन्स ने गोल्डन नाइट्स पर बनाई 3-2 की बढ़त, खिताब से एक जीत दूर न्यूयॉर्क निक्स ने 53 साल बाद रचा इतिहास, ब्रंसन के 45 अंकों से जीता NBA खिताब विमान ईंधन की मार से एयरलाइनों को राहत: कैबिनेट ने मंजूर किया 10,000 करोड़ का एटीएफ स्थिरीकरण कोष गृहिणियाँ 'राष्ट्र निर्माता' हैं: सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू श्रम का मूल्य कम से कम 30,000 रुपये मासिक आँका अमेरिकी हमले में तेन दे अरागुआ गिरोह का सरगना ढेर: ट्रंप का दावा, वेनेजुएला के सहयोग से हुई कार्रवाई फीफा विश्व कप 2026 का भव्य आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया, तीन लाल कार्ड का बना इतिहास फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 1990 के बाद सबसे ताकतवर
स्वास्थ्य

अब साल भर पैर पसार रहा डेंगू: भारत में मानसून से पहले ही फरवरी तक 6,927 मामले, जलवायु परिवर्तन बना कारण

भारत में डेंगू अब सिर्फ मानसून तक सीमित नहीं रहा। फरवरी 2026 के अंत तक देश में डेंगू के 6,927 मामले दर्ज किए गए, जो असामान्य रूप से जल्दी फैलाव का संकेत है। विशेषज्ञ इसके पीछे बढ़ते तापमान और अनियमित बारिश को जिम्मेदार मानते हैं।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 17 बार देखा
अब साल भर पैर पसार रहा डेंगू: भारत में मानसून से पहले ही फरवरी तक 6,927 मामले, जलवायु परिवर्तन बना कारण
एडीज एजिप्टी मच्छर, जो डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने के लिए जिम्मेदार है।

नई दिल्ली, 12 जून 2026। दशकों तक भारत में डेंगू का प्रकोप एक तय चक्र में चलता था, जिसमें मानसून के दौरान मामले बढ़ते, भारी बारिश के बाद चरम पर पहुंचते और फिर तापमान गिरने के साथ कम हो जाते थे। लेकिन अब यह पैटर्न तेजी से बदल रहा है। इस साल मानसून का मौसम आधिकारिक रूप से शुरू होने से पहले ही फरवरी 2026 के अंत तक देश में डेंगू के 6,927 मामले दर्ज किए जा चुके थे, जो असामान्य रूप से जल्दी फैलाव का संकेत है।

राज्यवार स्थिति

इस साल के शुरुआती आंकड़ों में तमिलनाडु सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा, जहां 2,873 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 786, केरल में 670 और कर्नाटक में 560 मामले सामने आए। चिंता की बात यह है कि मानसून शुरू होने से पहले ही कई शहरों के अस्पतालों में संदिग्ध डेंगू के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई, जो दर्शाता है कि बीमारी का मौसमी चरित्र अब बदल रहा है। यह बदलाव स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक नई चुनौती है।

क्यों बदल रहा है पैटर्न

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते तापमान और अनियमित बारिश के कारण मच्छर अब लंबे समय तक जीवित रह पा रहे हैं। महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज में सामुदायिक चिकित्सा के प्रोफेसर डॉ. हर्षदीप जोशी ने कहा कि डेंगू अब मानसून के बाद की अवधि तक सीमित नहीं रहा और इसके संक्रमण का दायरा बढ़ता दिख रहा है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान, 60 से 78 प्रतिशत के बीच आर्द्रता और मध्यम बारिश डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं।

वायु प्रदूषण से भी जुड़ाव

2026 के एक पर्यावरण प्रदूषण अध्ययन में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। अध्ययन में पाया गया कि जिन देशों में PM2.5 प्रदूषण का स्तर अधिक था, वहां डेंगू से होने वाली मृत्यु दर साफ-सुथरे इलाकों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक थी। यह निष्कर्ष भारत जैसे देश के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां कई शहर पहले से ही गंभीर वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की कई चुनौतियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।

चिकनगुनिया का खतरा भी

डेंगू के साथ-साथ चिकनगुनिया भी एक उभरते हुए खतरे के रूप में सामने आ रहा है, जिस पर बढ़ी हुई निगरानी रखी जा रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत चिकनगुनिया का सबसे बड़ा बोझ उठाने वाला देश बना हुआ है, जहां 2025 में इसके 34,876 संदिग्ध और पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे। ये मच्छर जनित बीमारियां मिलकर देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव डाल रही हैं, खासकर तब जब इनके संक्रमण का मौसम आपस में ओवरलैप करता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। टाकेडा की क्यूडेंगा वैक्सीन को मंजूरी दी गई है, जिसके स्थानीय उत्पादन के लिए बायोलॉजिकल ई के साथ साझेदारी की गई है। इसके अलावा, आईसीएमआर और पैनेसिया बायोटेक ने भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन 'डेंगीऑल' के लिए 10,335 स्वयंसेवकों के साथ तीसरे चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है। सीरम इंस्टीट्यूट भी 'टेट्रावैक्स-डीवी' के लिए तीसरे चरण का परीक्षण कर रहा है। ये वैक्सीन भविष्य में डेंगू नियंत्रण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

रोकथाम ही सबसे बड़ा उपाय

विशेषज्ञ बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका रोकथाम है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर और गमलों की नियमित सफाई, मच्छरदानी का उपयोग और पूरी बांह के कपड़े पहनना इन बीमारियों के प्रसार को काफी हद तक रोक सकते हैं। चूंकि एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं और दिन में काटते हैं, इसलिए जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं।

सबसे कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

लू का असर सब पर एक समान नहीं होता। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, खुले में काम करने वाले मजदूर और वे लोग जिनके पास ठंडक या साफ पानी की सुविधा नहीं है, सबसे अधिक खतरे में रहते हैं। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले और बेघर लोग, जो अक्सर खराब हवादार ढांचों में रहते हैं, विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि समय पर चेतावनी, सुलभ ठंडे आश्रय और बुनियादी जागरूकता से लू से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।

आगे क्या

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जब तक डेंगू को मौसमी बीमारी मानकर देखा जाता रहेगा, तब तक इससे निपटना मुश्किल रहेगा। बदलते जलवायु पैटर्न को देखते हुए अब साल भर मच्छर नियंत्रण, जल जमाव की रोकथाम और जन-जागरूकता पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। स्वदेशी वैक्सीन का सफल विकास और तैनाती आने वाले वर्षों में इस लड़ाई में एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकती है, बशर्ते इसे व्यापक स्तर पर सुलभ बनाया जाए।

स्रोत: Al Jazeera
शेयर: Facebook Twitter WhatsApp
अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

के सभी लेख देखें अजय राज →

टिप्पणियाँ (0)

रोज़ की मुख्य खबरों से जुड़े रहें

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और कोई खबर न चूकें।