जिनेवा, 12 जून 2026। मोटापे को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके इलाज के लिए GLP-1 दवाओं के उपयोग पर अपनी पहली वैश्विक गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पहली बार वैश्विक स्तर पर इन दवाओं को वयस्कों में मोटापे के इलाज के लिए सशर्त रूप से अनुशंसित किया गया है। यह सिफारिश सितंबर 2025 में इन दवाओं को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किए जाने से भी एक कदम आगे जाती है।
कौन सी दवाएं शामिल
WHO की इस गाइडलाइन में विशेष रूप से तीन GLP-1 दवाओं का उल्लेख किया गया है: लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड और टिरजेपेटाइड। गाइडलाइन के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को छोड़कर, वयस्क इन दवाओं का उपयोग दीर्घकालिक मोटापे के इलाज के हिस्से के रूप में कर सकते हैं। WHO मोटापे को 30 या उससे अधिक के बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) के रूप में परिभाषित करता है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह सिफारिश 'सशर्त' है, जो दीर्घकालिक प्रभावशीलता और सुरक्षा पर सीमित आंकड़ों, मौजूदा लागत और समानता संबंधी चिंताओं को दर्शाती है।
मोटापे का बढ़ता संकट
आंकड़े बताते हैं कि मोटापा आज दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों को प्रभावित कर रहा है। साल 2024 में मोटापा 37 लाख मौतों से जुड़ा रहा, और अनुमान है कि 2030 तक इसका प्रसार दोगुना हो सकता है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मोटापा अब सिर्फ एक जीवनशैली से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि एक गंभीर, दीर्घकालिक और बार-बार लौटने वाली बीमारी बन चुकी है, जिसके लिए व्यापक चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है, जहां शहरी इलाकों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।
WHO प्रमुख की चेतावनी
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अकेले दवा इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट का समाधान नहीं कर सकती, लेकिन ये उपचार लाखों लोगों को मोटापे से उबरने में मदद कर सकते हैं। संगठन ने जोर देकर कहा कि इन दवाओं का उपयोग एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा होना चाहिए, जिसमें स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य पेशेवरों का सहयोग शामिल हो। यह संदेश इस भ्रम को दूर करता है कि ये दवाएं किसी जादुई समाधान की तरह काम करती हैं।
चिंताएं और चुनौतियां
गाइडलाइन में कई महत्वपूर्ण चिंताओं को भी रेखांकित किया गया है। इनमें दीर्घकालिक सुरक्षा संबंधी आंकड़ों की कमी, दवा बंद करने पर वजन फिर बढ़ने की अनिश्चितता, इन दवाओं की ऊंची कीमत, स्वास्थ्य प्रणालियों की अपर्याप्त तैयारी, और बाजार में नकली व घटिया उत्पादों का प्रचलन शामिल है। ये चुनौतियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि इन दवाओं का उपयोग सावधानी और चिकित्सकीय निगरानी के साथ ही किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के इनका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है।