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स्वास्थ्य

मोटापे के इलाज पर WHO की पहली वैश्विक गाइडलाइन: सेमाग्लूटाइड समेत GLP-1 दवाओं को सशर्त मंजूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापे के इलाज के लिए GLP-1 दवाओं के उपयोग पर अपनी पहली वैश्विक गाइडलाइन जारी की है, जिसमें लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड और टिरजेपेटाइड को वयस्कों के लिए सशर्त रूप से अनुशंसित किया गया है।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 36 बार देखा
मोटापे के इलाज पर WHO की पहली वैश्विक गाइडलाइन: सेमाग्लूटाइड समेत GLP-1 दवाओं को सशर्त मंजूरी
सेमाग्लूटाइड (ओजेम्पिक) इंजेक्शन, उन GLP-1 दवाओं में से एक जिन्हें WHO ने मोटापे के इलाज के लिए सशर्त अनुशंसित किया है।

जिनेवा, 12 जून 2026। मोटापे को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके इलाज के लिए GLP-1 दवाओं के उपयोग पर अपनी पहली वैश्विक गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पहली बार वैश्विक स्तर पर इन दवाओं को वयस्कों में मोटापे के इलाज के लिए सशर्त रूप से अनुशंसित किया गया है। यह सिफारिश सितंबर 2025 में इन दवाओं को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किए जाने से भी एक कदम आगे जाती है।

कौन सी दवाएं शामिल

WHO की इस गाइडलाइन में विशेष रूप से तीन GLP-1 दवाओं का उल्लेख किया गया है: लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड और टिरजेपेटाइड। गाइडलाइन के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को छोड़कर, वयस्क इन दवाओं का उपयोग दीर्घकालिक मोटापे के इलाज के हिस्से के रूप में कर सकते हैं। WHO मोटापे को 30 या उससे अधिक के बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) के रूप में परिभाषित करता है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह सिफारिश 'सशर्त' है, जो दीर्घकालिक प्रभावशीलता और सुरक्षा पर सीमित आंकड़ों, मौजूदा लागत और समानता संबंधी चिंताओं को दर्शाती है।

मोटापे का बढ़ता संकट

आंकड़े बताते हैं कि मोटापा आज दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों को प्रभावित कर रहा है। साल 2024 में मोटापा 37 लाख मौतों से जुड़ा रहा, और अनुमान है कि 2030 तक इसका प्रसार दोगुना हो सकता है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मोटापा अब सिर्फ एक जीवनशैली से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि एक गंभीर, दीर्घकालिक और बार-बार लौटने वाली बीमारी बन चुकी है, जिसके लिए व्यापक चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है, जहां शहरी इलाकों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।

WHO प्रमुख की चेतावनी

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अकेले दवा इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट का समाधान नहीं कर सकती, लेकिन ये उपचार लाखों लोगों को मोटापे से उबरने में मदद कर सकते हैं। संगठन ने जोर देकर कहा कि इन दवाओं का उपयोग एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा होना चाहिए, जिसमें स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य पेशेवरों का सहयोग शामिल हो। यह संदेश इस भ्रम को दूर करता है कि ये दवाएं किसी जादुई समाधान की तरह काम करती हैं।

चिंताएं और चुनौतियां

गाइडलाइन में कई महत्वपूर्ण चिंताओं को भी रेखांकित किया गया है। इनमें दीर्घकालिक सुरक्षा संबंधी आंकड़ों की कमी, दवा बंद करने पर वजन फिर बढ़ने की अनिश्चितता, इन दवाओं की ऊंची कीमत, स्वास्थ्य प्रणालियों की अपर्याप्त तैयारी, और बाजार में नकली व घटिया उत्पादों का प्रचलन शामिल है। ये चुनौतियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि इन दवाओं का उपयोग सावधानी और चिकित्सकीय निगरानी के साथ ही किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के इनका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है।

समानता और पहुंच का सवाल

WHO ने एक गंभीर चिंता यह जताई है कि मौजूदा हालात में 2030 तक ये दवाएं पात्र मरीजों में से 10 प्रतिशत से भी कम तक पहुंच पाएंगी। इस असमानता को दूर करने के लिए संगठन ने सामूहिक खरीद, स्तरीय मूल्य निर्धारण और स्वैच्छिक लाइसेंसिंग जैसी रणनीतियों की वकालत की है। यह विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां मोटापा और मधुमेह तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन महंगी दवाओं तक पहुंच एक बड़ी बाधा बनी हुई है। सस्ती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

मोटापे का सामाजिक और आर्थिक बोझ

मोटापा केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और आर्थिक बोझ भी बहुत बड़ा है। यह मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है, जिससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ता है। उत्पादकता में कमी और बढ़ते इलाज खर्च के रूप में यह अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। WHO की यह गाइडलाइन इस बात को स्वीकार करती है कि मोटापे से निपटने के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास ही नहीं, बल्कि व्यवस्थागत और नीतिगत हस्तक्षेप भी जरूरी हैं।

आगे क्या

WHO ने घोषणा की है कि वह एक साक्ष्य-आधारित प्राथमिकता ढांचा विकसित करेगा, जिससे यह तय किया जा सके कि मोटापे से ग्रस्त किन वयस्कों को आपूर्ति और प्रणालीगत क्षमता बढ़ने के साथ GLP-1 उपचार के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह गाइडलाइन मोटापे के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, लेकिन इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन दवाओं को कितनी समानता और सुरक्षा के साथ जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है। आने वाले महीनों में कई देश अपनी राष्ट्रीय नीतियों में इन सिफारिशों को शामिल कर सकते हैं।

स्रोत: World Health Organization
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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