नई दिल्ली, 12 जून 2026। भारत में स्वास्थ्य सेवा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इंडियाएआई और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 7 मई 2026 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य जिम्मेदार और सुलभ एआई के माध्यम से स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाना है। यह साझेदारी इंडियाएआई के कंप्यूटिंग ढांचे और आईसीएमआर की जैव-चिकित्सा अनुसंधान विशेषज्ञता को एक साथ लाती है।
क्या है इस साझेदारी का उद्देश्य
इस सहयोग का मुख्य लक्ष्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर सुसंगत और अंतर-संचालनीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इसके तहत आईसीएमआर के रोग-भार संबंधी आंकड़ों के आधार पर ऐसे एआई समाधान विकसित और तैनात किए जाएंगे जो प्राथमिकता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों, खासकर गैर-संचारी रोगों (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) का समाधान कर सकें। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा में एआई के जिम्मेदार और बड़े पैमाने पर उपयोग को आगे बढ़ाना है।
MIDAS ढांचे की भूमिका
इस साझेदारी का एक केंद्रीय हिस्सा आईसीएमआर का MIDAS ढांचा है, जिसका पूरा नाम 'मेडिकल इन्फॉर्मेशन डेटा फॉर एआई सॉल्यूशंस' है। यह आईसीएमआर का जैव-चिकित्सा अनुसंधान ढांचा है, जो इस साझेदारी में गुमनाम (एनोनिमाइज्ड) और नैतिक रूप से स्वीकृत डेटासेट और एआई मॉडल का योगदान देगा। मरीजों की निजता की रक्षा करते हुए, यह डेटा एआई आधारित स्वास्थ्य समाधानों को प्रशिक्षित करने और उन्हें अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा। डेटा की गुणवत्ता ही किसी भी एआई मॉडल की सफलता की नींव होती है।
इंडियाएआई का योगदान
इस साझेदारी में इंडियाएआई कई महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध कराएगा। इसमें रियायती दरों पर जीपीयू-आधारित और उच्च-प्रदर्शन वाला कंप्यूटिंग ढांचा शामिल है, जो एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, यह एआई कौशल पहल और 'एआईकोश' (AIKosh) प्लेटफॉर्म तक पहुंच भी प्रदान करेगा। आईसीएमआर अपनी ओर से इसी एआईकोश प्लेटफॉर्म के माध्यम से गुमनाम स्वास्थ्य अनुसंधान डेटासेट और MIDAS ढांचे के तहत एआई मॉडल व टूलकिट साझा करेगा। यह सहयोग दोनों संस्थानों की ताकत को एक साथ लाता है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण
भारत जैसे विशाल और विविध देश में, जहां डॉक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है, एआई स्वास्थ्य सेवा को कई गुना बेहतर बनाने की क्षमता रखता है। एआई की मदद से बीमारियों का जल्दी पता लगाना, सही निदान करना और दूरदराज के इलाकों तक विशेषज्ञ स्तर की सलाह पहुंचाना संभव हो सकता है। खासकर गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर के बढ़ते बोझ को देखते हुए, एआई आधारित स्क्रीनिंग और निगरानी बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। यह डॉक्टरों की मदद करेगा, उनकी जगह नहीं लेगा।