नई दिल्ली, 10 जून। इस वर्ष पड़ रही भीषण गर्मी ने पूरे भारत को झुलसा कर रख दिया है। मई और जून 2026 के दौरान देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में पारा लगातार 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, बिहार और तेलंगाना सहित कई राज्यों के लिए लू (हीटवेव) की चेतावनी जारी की। गर्मी की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक समय दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 97 भारत में थे।
बिजली की मांग ने तोड़े रिकॉर्ड
तपती गर्मी के बीच एयर कंडीशनर और पंखों के बेतहाशा इस्तेमाल से बिजली की मांग आसमान छूने लगी। 21 मई 2026 को देश में बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड 270 गीगावॉट पर पहुंच गई—यह लगातार चौथी बार था जब राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटा। तुलना के लिए, जून 2025 में यह शिखर मांग 243 गीगावॉट थी। मांग के इस दबाव को पूरा करने के लिए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर भारी निर्भरता रही; अधिकतम भार के समय 75 प्रतिशत से अधिक बिजली कोयले से ही उत्पन्न की गई।
तापमान के नए कीर्तिमान
ओडिशा के बलांगीर में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के अकोला में 26 अप्रैल को देश का सर्वाधिक तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि मई में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 48 डिग्री के पार चला गया। आईएमडी के मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के दौरान पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत तथा दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप में सामान्य से अधिक लू वाले दिन रहने की आशंका जताई गई थी, जो सही साबित हुई।
जान-माल और जनजीवन पर असर
गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर कई मतदाता गर्मी से बेहोश होकर गिर पड़े। ड्यूटी पर तैनात जनगणना कर्मियों की भी मौत की खबरें आईं। एक व्यक्ति की शादी समारोह में जाते समय गर्मी से मृत्यु हो गई। हालांकि भारत में हीटस्ट्रोक और गर्मी से होने वाली मौतों का कोई एकीकृत राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे वास्तविक मृत्यु संख्या का अनुमान लगाना कठिन हो जाता है। एक अध्ययन के अनुसार अत्यधिक गर्मी का एक दिन देश में लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतों का कारण बनता है, और पांच दिन की लू से लगभग 30,000 अतिरिक्त मौतें जुड़ी हो सकती हैं।
अर्थव्यवस्था और खेती पर मार
गर्मी का असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा। यह लू गेहूं की कटाई के मौसम में पड़ी, जिससे फसल को नुकसान का खतरा बढ़ गया। शोध बताते हैं कि तापमान में प्रत्येक एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की पैदावार में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। आर्थिक मोर्चे पर भी भारी नुकसान हुआ; पूर्व के एक लैंसेट अध्ययन में बताया गया था कि गर्मी के संपर्क के कारण लगभग 247 अरब संभावित श्रम घंटे नष्ट हो जाते हैं, जिनका मूल्य लगभग 194 अरब डॉलर आंका गया—और 2026 में ये आंकड़े और बिगड़ने की आशंका है।