नई दिल्ली, 16 मई। सिंधु जल संधि (इंडस वाटर्स ट्रीटी) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। 15 मई 2026 को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (पीसीए) के अधीन गठित मध्यस्थता न्यायालय ने 'अधिकतम पॉन्डेज' (अधिकतम जल भंडारण) के तकनीकी मुद्दे पर एक अनुपूरक फैसला सुनाया। भारत ने इस फैसले को तत्काल और दृढ़ता से खारिज करते हुए इसे 'अमान्य और शून्य' (नल एंड वॉइड) करार दिया।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी प्रणाली पर बन रही किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन से जुड़ा है। 'पॉन्डेज' से तात्पर्य उस जल की मात्रा से है जिसे रन-ऑफ-रिवर (नदी के प्रवाह पर आधारित) जलविद्युत परियोजनाओं के लिए संग्रहीत किया जा सकता है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत की इन परियोजनाओं का डिजाइन संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, जबकि भारत का कहना है कि उसकी परियोजनाएं पूरी तरह संधि के अनुरूप हैं। यह संधि भारत को पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—पर सीमित उपयोग का अधिकार देती है।
भारत का कड़ा रुख
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने स्पष्ट किया कि 15 मई 2026 को 'अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायालय' ने अधिकतम पॉन्डेज से संबंधित जो फैसला सुनाया, वह संधि की सामान्य व्याख्या के मुद्दों पर पहले दिए गए फैसले का अनुपूरक है। भारत ने इस फैसले को खारिज करते हुए दोहराया कि यह न्यायालय अवैध रूप से गठित है और इसके किसी भी निर्णय का कोई कानूनी आधार नहीं है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि फिलहाल 'स्थगन' (अबेयंस) की स्थिति में बनी हुई है।
संधि के स्थगन की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम उस व्यापक तनाव की पृष्ठभूमि में है जो अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के बाद उपजा था। उस हमले के बाद भारत ने पहली बार सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था—यह पहला अवसर था जब द्विपक्षीय तनाव ने इस छह दशक पुरानी संधि को प्रभावित किया। तब से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनातनी लगातार बढ़ती गई है।
पाकिस्तान का दावा
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने 15 मई के फैसले का स्वागत किया। इस्लामाबाद ने कहा कि न्यायालय ने रतले और किशनगंगा परियोजनाओं के डिजाइन से जुड़े विवादों में 'पाकिस्तान की केंद्रीय स्थिति की पुष्टि की है' कि संधि पश्चिमी नदियों पर भारत की जल-नियंत्रण क्षमता पर ठोस सीमाएं लगाती है। जनवरी 2026 में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में एक 'अरिया फॉर्मूला' बैठक आयोजित की थी, जिसमें उसके राजदूत ने भारत की स्थिति को 'अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का गंभीर उल्लंघन' बताया था। अप्रैल 2026 के अंत में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी थी कि सिंधु प्रणाली पर निर्भर 24 करोड़ लोगों के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।