देहरादून, 12 जून। हिमालय की गोद में बसे चार पवित्र धाम—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ—की वार्षिक चारधाम यात्रा 2026 इस वर्ष फिर श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गई है। यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ हुई; केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल और बदरीनाथ के 23 अप्रैल को खोले गए। अप्रैल के अंत तक ही लगभग 19 लाख श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके थे। तुलना के लिए, पिछले वर्ष 51 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने यह यात्रा की थी, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
अनिवार्य पंजीकरण कैसे करें
चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब जाने वाले हर यात्री के पास पंजीकरण होना ज़रूरी है। प्रथम चरण का ऑनलाइन पंजीकरण 6 मार्च 2026 को शुरू हुआ था। यात्री उत्तराखंड पर्यटन के आधिकारिक पोर्टल और मोबाइल ऐप के ज़रिए पंजीकरण करा सकते हैं, जहाँ आधार या अन्य पहचान-पत्र और यात्रा की तारीख़ देनी होती है। बिना पंजीकरण के धामों तक पहुँच प्रतिबंधित रहती है। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और किसी आपात स्थिति में यात्रियों का सटीक रिकॉर्ड रखना है।
इस वर्ष के नए नियम
2026 में कुछ नई व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री में प्रशासन ने ग़ैर-हिंदू आगंतुकों के लिए कुछ शर्तें तय की हैं, और बदरीनाथ में सनातन धर्म में आस्था की पुष्टि करने वाला शपथ-पत्र माँगा जा रहा है। यात्रियों को सलाह है कि यात्रा से पहले संबंधित मंदिर समिति और ज़िला प्रशासन की ताज़ा अधिसूचनाओं को ज़रूर देख लें, क्योंकि भीड़-प्रबंधन के लिए दैनिक संख्या-सीमा और प्रवेश नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं। मंदिर परिसर में मोबाइल फ़ोन और वीडियोग्राफ़ी पर भी कुछ प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
स्वास्थ्य और ऊँचाई का ध्यान
चारों धाम ऊँचाई पर स्थित हैं—केदारनाथ लगभग 3,580 मीटर और बदरीनाथ क़रीब 3,300 मीटर की ऊँचाई पर। इतनी ऊँचाई पर ऑक्सीजन कम होती है, इसलिए ऊँचाई-जनित बीमारी (एएमएस) का ख़तरा रहता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शरीर को धीरे-धीरे ढलने दें, ख़ूब पानी पिएँ, भारी भोजन से बचें और हृदय या साँस संबंधी रोग हों तो डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। केदारनाथ की 16 किलोमीटर की चढ़ाई के लिए शारीरिक तैयारी बेहद ज़रूरी है; कई यात्री हफ़्तों पहले से पैदल चलने का अभ्यास शुरू कर देते हैं। ज़रूरी दवाइयाँ, गर्म कपड़े और एक छोटी ऑक्सीमीटर साथ रखना समझदारी है।
मौसम और मानसून की चुनौती
यात्रा के दौरान पहाड़ी मौसम बेहद अनिश्चित रहता है। मई-जून में दिन सुहावने पर रातें ठंडी होती हैं, जबकि जून के अंत से मानसून दस्तक देने लगता है। मानसून में भूस्खलन और रास्ते बंद होने का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए यात्री गर्म कपड़े, रेनकोट, मज़बूत जूते और प्राथमिक उपचार किट साथ रखें। मौसम विभाग और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना सुरक्षित यात्रा की पहली शर्त है। पहाड़ों में मौसम कुछ ही घंटों में बदल सकता है, इसलिए यात्रा-कार्यक्रम में लचीलापन रखना ज़रूरी है।