रत्नागिरी, 12 जून। गर्मियों की सबसे बड़ी मिठास—आम—का इंतज़ार हर भारतीय को रहता है, और इन सबमें 'आमों का राजा' कहलाने वाला अल्फांसो यानी हापुस सबसे ख़ास है। मगर 2026 का मैंगो सीज़न कोंकण के बाग़ान मालिकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। बेमौसम बारिश के कारण इस वर्ष कोंकण क्षेत्र में अल्फांसो की पैदावार में लगभग 75 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा असर बाज़ार में आम की उपलब्धता और क़ीमतों पर पड़ा है। यह गिरावट किसानों और आम-प्रेमियों, दोनों के लिए निराशाजनक रही।
2026 का सीज़न: मीठा पर महँगा
अल्फांसो का सीज़न आमतौर पर रत्नागिरी हापुस के लिए मध्य फ़रवरी और देवगढ़ हापुस के लिए मार्च की शुरुआत से आरंभ होता है, और इसका चरम मार्च-अप्रैल में रहता है। यह मौसम फ़रवरी से जून तक क़रीब चार महीने चलता है। इस साल अनुकूल सर्दियों ने शुरुआती फल की गुणवत्ता तो अच्छी रखी—पहले 'फ़्लश' के फल में 18 से 20 डिग्री ब्रिक्स तक मिठास दर्ज हुई और मुख्य सीज़न में यह 18 से 22 डिग्री तक रही। पर उत्पादन घटने से क़ीमतें चढ़ गईं—रत्नागिरी अल्फांसो की शुरुआती क़ीमत क़रीब 2,249 रुपये प्रति दर्जन और देवगढ़ हापुस 2,499 रुपये प्रति दर्जन तक पहुँची। यही वजह रही कि इस साल हापुस आम ख़ास और विरल बना रहा।
जीआई-टैग वाली किस्में
अल्फांसो की दो सबसे प्रतिष्ठित किस्में—रत्नागिरी हापुस और देवगढ़ हापुस—दोनों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है और ये कार्बाइड-मुक्त रूप से उगाई जाती हैं। रत्नागिरी हापुस की बनावट थोड़ी सख़्त और सुगंध तेज़ होती है, जबकि देवगढ़ हापुस अपेक्षाकृत बड़ा और नरम होता है। इनके अलावा गुजरात के जूनागढ़-गिर क्षेत्र का केसर आम भी जीआई-टैग रखता है और अपनी केसरिया रंगत व ख़ुशबू के लिए प्रसिद्ध है। जीआई टैग उपभोक्ता को यह भरोसा देता है कि फल अपने मूल भौगोलिक क्षेत्र का प्रामाणिक उत्पाद है।
भारत की आम-विविधता
भारत आमों की विविधता का खज़ाना है। अल्फांसो और केसर के अलावा उत्तर भारत का दशहरी और लंगड़ा, बनारस का लंगड़ा, बिहार का जर्दालू, दक्षिण का बैंगनपल्ली और बंगाल का हिमसागर—हर क्षेत्र की अपनी पहचान है। हर किस्म का स्वाद, बनावट और पकने का समय अलग होता है, जिससे गर्मियों के इन महीनों में देशभर के बाज़ार रंग-बिरंगे आमों से भर जाते हैं। यही विविधता भारत को दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश बनाती है, और आम यहाँ केवल फल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक है।
असली हापुस कैसे पहचानें
बढ़ती माँग और ऊँची क़ीमतों के बीच नक़ली या मिलावटी आम का ख़तरा भी रहता है। असली अल्फांसो की पहचान उसकी गहरी सुनहरी-केसरिया रंगत, बेहद महीन रेशे-रहित गूदे और तीव्र सुगंध से होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कैल्शियम कार्बाइड से कृत्रिम रूप से पकाए गए आमों से बचें—ऐसे फल अक्सर बाहर से पीले पर अंदर से कच्चे और बेस्वाद रहते हैं और सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। प्राकृतिक रूप से पके आम की सुगंध डंठल की ओर से सबसे तेज़ आती है। ख़रीदते समय फल को हल्का दबाकर देखें—प्राकृतिक रूप से पका आम नरम पर एकसमान होता है।