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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग', मुख्य आयोजन कोलकाता में

21 जून 2026 को 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। आयुष मंत्रालय ने 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' थीम तय की है और मुख्य आयोजन कोलकाता में होगा। जानें पूरी जानकारी।

अजय राज अजय राज 14 जून 2026, 09:08 AM 1 मिनट में पढ़ें 23 बार देखा
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग', मुख्य आयोजन कोलकाता में
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' है; मुख्य आयोजन कोलकाता में होगा।

नई दिल्ली, 12 जून। दुनिया भर में योग की भारतीय परंपरा का उत्सव—अंतरराष्ट्रीय योग दिवस—इस वर्ष 21 जून 2026 को बारहवीं बार मनाया जाएगा। आयुष मंत्रालय ने इस बार की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' (योग फ़ॉर हेल्दी एजिंग) घोषित की है, जो वृद्धावस्था में सक्रिय जीवन, गरिमा और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी है। इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय आयोजन कोलकाता में होगा। यह थीम एक ऐसे समय में आई है जब भारत में बुज़ुर्गों की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है।

थीम का संदेश

'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' थीम एक महत्वपूर्ण सामाजिक ज़रूरत की ओर ध्यान खींचती है। बढ़ती जीवन-प्रत्याशा के साथ बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ रही है, और योग उन्हें शारीरिक लचीलापन, संतुलन, मानसिक शांति और आत्मनिर्भरता बनाए रखने में मदद कर सकता है। आयुष मंत्रालय ने इस थीम को 'योग 365' पहल से जोड़ा है, जो पूरे साल नियमित योग-अभ्यास को बढ़ावा देती है—यानी योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन-शैली बने। यह दृष्टिकोण निवारक स्वास्थ्य-देखभाल को बढ़ावा देता है, जो चिकित्सा-व्यय घटाने में भी सहायक है।

आयुष मंत्रालय की तैयारियाँ

योग दिवस से पहले आयुष मंत्रालय ने जागरूकता अभियानों और आउटरीच गतिविधियों की एक शृंखला चलाई है, जिनमें स्वस्थ बुढ़ापे, निवारक स्वास्थ्य-देखभाल और समग्र कल्याण पर विशेष ज़ोर है। 8 जून 2026 को मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित आयुष भवन में आरजे और इन्फ़्लुएंसर मीट आयोजित की, ताकि मीडिया और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए संदेश को व्यापक रूप से फैलाया जा सके। मंत्रालय ने ग़ैर-संचारी रोगों और विशेष समूहों के लिए '10 योग प्रोटोकॉल' भी जारी किए हैं, जिनमें बुज़ुर्गों के लिए एक समर्पित प्रोटोकॉल शामिल है। इन प्रोटोकॉल का मक़सद योग को वैज्ञानिक और सुरक्षित ढंग से जन-जन तक पहुँचाना है।

बुज़ुर्गों के लिए योग के लाभ

उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में अकड़न, संतुलन की कमी, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और अकेलेपन जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं। कोमल योगासन, प्राणायाम और ध्यान इन चुनौतियों से जूझने में मदद करते हैं। ताड़ासन, वृक्षासन और सरल खिंचाव संतुलन व लचीलापन सुधारते हैं; अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम तनाव घटाते और नींद बेहतर करते हैं। विशेषज्ञ ज़ोर देते हैं कि बुज़ुर्ग किसी प्रशिक्षित योग-शिक्षक की देखरेख में, अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें। नियमित अभ्यास से न केवल शरीर, बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है।

सावधानियाँ ज़रूरी

योग के लाभ तभी टिकाऊ होते हैं जब इसे सही ढंग से किया जाए। बुज़ुर्गों और किसी भी पुराने रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को आसन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दर्द या असुविधा होने पर आसन को बलपूर्वक न करें। खाली पेट या भोजन के कई घंटे बाद, खुली हवादार जगह में और आरामदायक कपड़ों में अभ्यास सबसे अच्छा रहता है। धीरे-धीरे शुरुआत करना और निरंतरता बनाए रखना—यही योग की असली कुंजी है। साँस और शरीर के संकेतों को सुनना और अपनी सीमा का सम्मान करना सबसे ज़रूरी है।

योग की वैश्विक यात्रा

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2014 में स्वीकार किया था, और पहला आयोजन 2015 में हुआ। तब से यह दिवस दुनिया भर के सैकड़ों देशों में मनाया जाता है, जहाँ लाखों लोग एक साथ योगाभ्यास करते हैं। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बन गया है। योग आज किसी एक देश की सीमा से परे, समूची मानवता के स्वास्थ्य का साझा साधन बन चुका है।

आगे क्या

21 जून को देश भर में—पार्कों, स्कूलों, कार्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में—सामूहिक योग सत्र आयोजित होंगे, जिनमें कोलकाता का मुख्य कार्यक्रम केंद्र-बिंदु रहेगा। पर असली संदेश आयोजन से आगे का है—योग को साल के एक दिन तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना। स्वस्थ बुढ़ापे की कुंजी आज की नियमित आदतों में छिपी है, और यही 2026 की थीम का सार है। यदि हर आयु-वर्ग योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर ले, तो एक स्वस्थ और सक्रिय समाज की नींव अपने-आप मज़बूत होगी।

केवल आसन नहीं, एक समग्र जीवन-दर्शन

योग को अक्सर केवल शारीरिक आसनों तक सीमित समझ लिया जाता है, जबकि यह एक समग्र जीवन-दर्शन है। पारंपरिक योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान के साथ-साथ यम-नियम, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच भी शामिल है। बुज़ुर्गों के लिए यह पक्ष विशेष रूप से अहम है, क्योंकि अकेलापन और मानसिक तनाव वृद्धावस्था की बड़ी चुनौतियाँ हैं। समूह में किया गया योग सामाजिक जुड़ाव बढ़ाता है, जिससे अकेलेपन का अहसास घटता है। यही कारण है कि सामुदायिक पार्कों और वरिष्ठ नागरिक केंद्रों में सामूहिक योग सत्र तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जहाँ स्वास्थ्य-लाभ के साथ-साथ अपनेपन का भाव भी मिलता है।

स्रोत: GKToday
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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